Thursday, May 19, 2022
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कर्ज देने वाले अवैध Apps के खिलाफ 2500 शिकायतें

Updated on 22/April/2022 9:56:40 AM

नई दिल्ली। देश में डिजिटल कर्ज देने वाले अवैध एप्लीकेशंस के खिलाफ सरकार को ढाई हजार से ज्यादा शिकायतें मिली हैं। इनमें महाराष्ट्र और कर्नाटक के लोगों की शिकायतें सबसे ज्यादा हैं।

आंकड़ों के मुताबिक,सरकार को इन ऐप के खिलाफ कुल 2562 शिकायतें मिली हैं। इसमें से करीब 1000 शिकायतें महाराष्ट्र और कर्नाटक से जुड़ी हैं। वहीं दिल्ली, हरियाणा और यूपी जैसे राज्यों में इनकी संख्या कम हैं। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के आकंड़ों के मुताबिक, देश में दर्ज कुल शिकायतों में से महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 572 शिकायतें दर्ज हुई हैं। वहीं,394 शिकायतों के साथ कर्नाटक दूसरे और 352 शिकायतों के साथ दिल्ली तीसरे है। हरियाणा में 314 और उत्तर प्रदेश में 142 शिकायतें दर्ज हुई हैं।

जनवरी 2020 से मार्च 2021 तक राज्यवार शिकायतों की संख्या
महाराष्ट्र 572
कर्नाटक 394
दिल्ली 352
हरियाणा 314
उत्तर प्रदेश 142
पश्चिम बंगाल 138
गुजरात 56

रिजर्व बैंक की कार्यदल की ताजा रिपोर्ट के हिसाब से देश में करीब 600 से ज्यादा अवैध डिडिटल कर्ज देने वाले मोबाइल एप्लीकेशन थे, जिनसे निपटने के लिए अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए गए। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ऐसे 27 गैर कानूनी ऐप पर रोक भी लगाई है।

शिकायतों से निपटने की व्यवस्था

भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्ज में नवाचार को बढ़ावा देने के मकसद से आठ दिसंबर 2021 तक 13 गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को ऐप या डिजिटल माध्यम से परिचालन की मंजूरी दी है। डिजिटल उधार प्लेटफॉर्म के खिलाफ आ रही शिकायतों से निपटने के लिए रिजर्व बैंक ने सचेत पोर्टल भी बनाया है। ग्राहकों की शिकायतों को यहां से समाधान के लिए कॉरपोरेट मंत्रालय और शिकायतकर्ता के राज्य के आर्थिक अपराध शाखा को भेजा जाता है।

विशेषज्ञ की राय
साइबर मामलों के विशेषज्ञ पवन दुग्गल का कहना है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में लोगों का डिजिटल माध्यम में कर्ज लेने पर ज्यादा जोर रहता है। यही वजह है कि वहां उत्तर भारत के राज्यों के मुकाबले लोग एप आधारित डिजिटल कर्ज को भी प्राथामिकता दे देते हैं। साथ ही जब वहां इस धंधे में अवैध लोग शामिल होते हैं तो ठगी भी होती है और लोगों की शिकायतें भी बढ़ती हैं।

आरबीआई समय-समय पर करता है सचेत
इसके अलावा गृहमंत्रालय और रिजर्व बैंक की तरफ से समय-समय पर फर्जीवाड़ा करने वाले एप्लीकेशनों के माध्यम से कर्ज लेने को लेकर सचेत भी किया जाता है। यह एप्लीकेशन ग्राहकों को सस्ते कर्ज के नाम पर या तो ऊंचा ब्याज लेते हैं या फिर उनसे धोखाधड़ी करते हैं।
त्योहार मनाने के लिए ज्यादा लेते हैं व्यक्तिगत ऋण

तीन साल पहले की तुलना में 2021 के त्योहारी महीनों के दौरान लोगों द्वारा व्यक्तिगत ऋण लेने का आंकड़ा दोगुना हो गया है। क्रेडिट ब्यूरो, क्रिफ हाई मार्क की रिपोर्ट के मुताबिक, व्यक्तिगत ऋण का आंकड़ा 2018 की दिसंबर तिमाही के 75,000 करोड़ रुपये की तुलना में दिसंबर, 2021 की तिमाही में दोगुना होकर 1.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। इस खंड में चूक भी अधिक होती है, क्योंकि बैंक बिना किसी गारंटी के इस तरह का कर्ज देते हैं। इसके लिए बैंक ऊंचा ब्याज भी वसूलते हैं।

इस अवधि में मूल्य के हिसाब से व्यक्तिगत ऋण में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और गैर-बैंक ऋणदाताओं की हिस्सेदारी बढ़ी, जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी में गिरावट आई। रिपोर्ट में कहा गया कि जब मात्रा के संदर्भ में तुलना की गई, तो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी में गिरावट आई। जबकि निजी बैंकों और एनबीएफसी के लिए समान रूप से समीक्षाधीन अवधि के दौरान वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में दोपहिया ऋण मूल्य के संदर्भ में घटकर 15,281 करोड़ रुपये रह गया, जो वित्त वर्ष 2018-19 की समान अवधि में 16,393 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2021-22 की दिसंबर तिमाही में आवास ऋण का आंकड़ा 2018-19 की समान तिमाही से 40 प्रतिशत बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

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