Wednesday, September 28, 2022
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नेपाल ने मटर,सुपारी,व कालीमिर्च का खोला आयात,बढ़ी भारत की चिंता

Updated on 16/September/2022 2:45:56 PM

नेपाल ने एक बार फिर मटर, सुपारी व कालीमिर्च का आयात खोल दिया है। अब नेपाल में दूसरे देशों से ये सामान मंगाए जाएंगे। लेकिन इसे लेकर चिंता भारत में बढ़ गई है। वजह, इन सामानों की होने वाली तस्करी है। तस्करी के शोर के बीच ही पिछले वर्ष नेपाल ने इन सामानों के आयात पर रोक लगाई थी। दोबारा आयात को हरी झंडी मिलने के बाद तस्करी के जोर पकड़ने को लेकर जांच एजेंसियां सजग हो गई हैं।

कनेडियन मटर की नेपाल से भारतीय क्षेत्र में तस्करी नई बात नहीं है। कनाडा से मटर सीधे नेपाल आयात की जाती है। फिर वहां से चोरी-छिपे खुली सीमा का लाभ लेकर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा दी जाती है। वहीं सुपारी व कालीमिर्च की तस्करी भी बड़े पैमाने पर होती रही है। नेपाल से भारत में तस्करी के बढ़े मामलों और शोर के बाद नेपाल सरकार ने पिछले वर्ष इनके आयात पर रोक लगा दी थी। वहीं, खुली सीमा का लाभ उठाकर भारत से खाद और डीजल की तस्करी नेपाल में होती है।

उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय के अनुसार सरकार ने एचएस कोड 0713.10.00 मटर, एचएस कोड 0802.80.00 सुपारी और एचएस कोड 0904.11.30 कालीमिर्च के आयात की अनुमति देने का फैसला किया है। नेपाल में 21 अगस्त को प्रकाशित गजट में इसका नोटिफिकेशन हुआ है, लेकिन प्रकाशन दो दिन पहले हुआ है। कहा जा रहा है कि औद्योगिक उद्देश्यों के लिए ये वस्तुएं कच्चे माल के रूप में आयात की जाएंगी। तस्करी के लिए मांग से अधिक होता है। आयात नेपाल में इन वस्तुओं को जरूरत से बहुत अधिक मात्रा में आयात किया जाता है। भारत के मुकाबले नेपाल में ये बहुत सस्ती होती है।

व्यापार मंडल नौतनवा के तहसील अध्यक्ष सुभाष जायसवाल कहते हैं कि नेपाल कालीमिर्च, मटर व सुपारी उन देशों से आयात करता है, जिन देशों से भारत ने आयात पर रोक लगाई है। वजह वहां के इन सामानों में केमिकल अधिक है और ये स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। तस्करी के कारण पूर्वांचल में भारतीय सुपारी, काली मिर्च, मटर की बिक्री थोक बाजार में कम रहती है।

सोनौली, कोतवाल, महेन्द्र यादव ने कहा कि तस्करी रोकने को लेकर सीमा पर पुलिस व एजेंसियां चौकन्नी हैं। एक वर्ष के आंकड़ों को देखें तो इन सामानों की तस्करी नहीं के बराबर रही है। उससे पहले कनेडियन मटर के साथ काली मिर्च व सुपारी की तस्करी के मामले अधिक रहे हैं।

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