Wednesday, July 6, 2022
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मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव में लागू होगा OBC आरक्षण,SC ने दिया आदेश

Updated on 18/May/2022 1:08:03 PM

भोपाल। मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ होंगे। यह आदेश आज सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की दूसरी रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है। कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर आरक्षण की स्थिति तय कर सरकार को चुनाव प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। सु्प्रीम कोर्ट के इस आदेश को शिवराज सरकार की जीत बताई जा रही है। भाजपा ने इसकी अपनी जीत बताई है तो कांग्रेस ने कहा है कि यह कोई नहीं बात नहीं है बल्कि अदालत ने पुराने 14 फीसदी आरक्षण को रखा है। मगर ओबीसी की मध्य प्रदेश में आबादी 56 फीसदी है और इस हिसाब से ओबीसी वर्ग की सही स्थिति अदालत में नहीं रखी गई। इससे उनके साथ घोर अन्याय हुआ है।

मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को हरी झंडी दे दी है। पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की विस्तृत रिपोर्ट को अदालत ने मान्य किया है। अदालत ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। साथ ही एक सप्ताह के आधार पर ओबीसी आरक्षण के साथ चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए हैं।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कांग्रेस के चुनाव रोकने के प्रयास नाकाम
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने नगरीय निकाय चुनाव में ऐतिहासिक निर्णय दिया है। सर्वोच्च न्याय का आभार माना। सीएम का संकल्प था कि स्थानीय निकाय चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ होगा। सरकार के पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पर जो फैसला सुनाया है, वह स्वागत योग्य है। कांग्रेस इस चुनाव को रोकने का जो भी प्रयास किया था, वह सफल नहीं हो सके। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कई जगह 27 से भी ज्यादा ओबीसी को आरक्षण मिलने की संभावना है।

भाजपा ने सही तरह से स्थिति स्पष्ट नहीं की
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सही स्थिति नहीं रखी गई। उन्होंने कहा कि ओबीसी को वास्तव में केवल 14 फीसदी ही आरक्षण मिलेगा जबकि इस वर्ग की आबादी 56 फीसदी है। सरकार ने सही स्थिति कोर्ट में नहीं रखा गया और इस कारण ओबीसी वर्ग के साथ घोर अन्याय हुआ है।

तन्खा ने कहा
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश की सत्यता को समझकर फैसला सुनाया है। यह भाजपा की जीत नहीं है बल्कि जो पुराना आरक्षण 14 फीसदी पर ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। मगर ओबीसी के आरक्षण के बिना चुनाव नहीं होना यह मध्य प्रदेश के ओबीसी वर्ग की जीत है।

सरकार ने यह की थी तैयारी
अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का सरकार ने गठन किया था। आयोग ने तीन महीने के भीतर अपनी तैयारी कर वार्ड के मुताबिक ओबीसी की स्थिति का पता लगाकर रिपोर्ट तैयार की। 600 पेज के साथ आयोग ने यह रिपोर्ट बनाई। इसमें सभी वार्डों में ओबीसी की आबादी को बताया गया और उसे सुप्रीम कोर्ट को पेश किया गया था।

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