तीनों बच्चों के लिए मुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान, निवेशकों की हो जाएगी बल्ले-बल्ले
नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने तीनों बच्चों के लिए टारगेट सेट किए हैं। तीनों बच्चों को वह टेलीकॉम, रिटेल और न्यू एनर्जी कारोबार की जिम्मेदारी देने वाले हैं। धीरूभाई अंबानी की जयंती पर मनाए जाने वाले रिलायंस फैमेली डे के मौके पर मुकेश अंबानी ने कहा कि तेल से लेकर टेलीकॉम और रिटेल तक का कारोबार करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड सेल्फ ट्रांसफोर्मेशन यात्रा पर चल पड़ी है।
5 साल बाद रिलायंस के 50 साल पूरे हो जाएंगे
अंबानी ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2022 के अंत में रिलायंस अपने स्वर्णिम दशक की आधी दूरी तय कर चुकी होगी। अब से 5 साल बाद, रिलायंस की स्थापना को 50 साल पूरे हो जाएंगे। इस दौरान उन्होंने कहा हमारे सभी बिजनेस के टीम लीडर और कर्मचारियों से मेरी जो उम्मीदें हैं, उनका मैं यहां जिक्र कर रहा हूं।
5जी सर्विस 2023 में पूरी तरह शुरू हो जाएगी
मुकेश अंबानी के बड़े बेटे आकाश टेलीकॉम इंडस्ट्री की कमान संभालेंगे, बेटी ईशा रिटेल बिजनेस संभाल रही हैं। छोटे बेटे अनंत न्यू एनर्जी बिजनसे की जिम्मेदारी संभालेंगे। अंबानी ने कहा, ‘आकाश की लीडरशिप में जियो देश में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ 5जी नेटवर्क शुरू कर रहा है और जिस रफ्तार से इस सर्विस की शुरुआत की जा रही है वह दुनियाभर में सबसे तेज है।’ उन्होंने यह भी बताया कि जियो 5जी सर्विस 2023 में पूरी तरह से शुरू हो जाएगी।
ईशा के नेतृत्व में रिटेल बिजनेस तेजी से बढ़ा
मुकेश अंबानी ने कहा कि ईशा के नेतृत्व में रिटेल बिजनेस की बहुत तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा, ‘हमारा खुदरा व्यवसाय, सभी श्रेणी के उत्पादों में, भारत में बहुत ही व्यापक और गहरी पहुंच वाले कारोबार में रूप में उभरा है।’ न्यू एनर्जी के बारे में अंबानी ने कहा, ‘रिलायंस का सबसे नया स्टार्टअप कारोबार है न्यू एनर्जी में न केवल कंपनी या देश बल्कि पूरी दुनिया को बदलने की ताकत है।’
उन्होंने कहा, ‘अनंत आगामी एवं अगली पीढ़ी के व्यवसाय से जुड़ रहे हैं और इसके साथ ही हमने जामनगर में अपने गीगा कारखानों को तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।’ उन्होंने कहा कि भारत का सबसे बड़ा और मूल्यवान कॉरपोरेट समूह रिलायंस भारत का सबसे ‘हरित’ कॉरपोरेट समूह भी बनने जा रहा है।
मुकेश अंबानी ने कहा, ‘हमारी नवीन ऊर्जा टीम के लक्ष्य बिलकुल स्पष्ट हैं। भारत की निर्भरता आयात पर कम करके ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सुरक्षा हासिल करना है. याद रहे, ऐसा आप मुस्तैद और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आगे रहते हुए ही कर सकते हैं।’