माँ शीतला का दर्शन-पूजन करने से होती है सारे मनौती पूर्ण

माँ शीतला का दर्शन-पूजन करने से होती है सारे मनौती पूर्ण
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जौनपुर। मां शीतला का दर्शन-पूजन चौकियां धाम में करने के बाद ही विंध्यवासिनी देवी का दर्शन करने पूर्वाचल के अधिसंख्य लोग जाते हैं। मान्यता है कि यहां के बाद ही वहां जाने पर लोगों की मनौती पूर्ण होती है। यही कारण है कि गोरखपुर, देवरिया, बलिया, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर समेत कई जनपदों के श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहता है।

इस सिद्धपीठ से संबंधित कुछ किंवदंतियां हैं, जो ऐतिहासिकता को प्रमाणित करती हैं। लोग बताते हैं कि देवचंद माली के नाम पर शीतला चौकियां के गांव का नाम देवचंदपुर पड़ा। कथानक के अनुसार जब इब्राहिम शाह शर्की ने गोमती नदी के किनारे प्रेमराजपुर स्थित विजय मंदिर जो शीतला देवी का मंदिर था, को ढहवाने लगा तो कुछ हिंदू भक्त शीतला देवी की मूर्ति उठा ले गए। उसे देवचंदपुर में स्थापित कर दिया। वहीं शीतला देवी मंदिर धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात हो गया।

यहां समय-समय पर सुंदरीकरण भी कराया जाता रहा है। प्रसिद्ध सरोवर, लक्ष्मी नारायण मंदिर इस देवी स्थल की रौनकता को बढ़ाते हैं। इस शक्ति पीठ पर पूजा तथा दर्शन करने के लिए प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, पं. कमलापति त्रिपाठी, श्रीप्रकाश, जय प्रकाश नारायण समेत कई राजीतिज्ञ दिग्गज और फिल्म अभिनेता गोविंदा भी आ चुके हैं।

जिला मुख्यालय से महज छह किलोमीटर की दूरी पर पूर्वोत्तर की दिशा में मां शीतला चौकियां धाम है। मार्कण्डेय पुराण में उल्लिखित ‘शीतले तू जगन्नमाता, शीतले तू जगत्पिता, शीतले तू जगत्धात्री, शीतलाय नमो नम:” से शीतला देवी की पौराणिकता का पता चलता है।

यह पावन स्थल स्थानीय व दूर-दराज से प्रतिवर्ष आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था एवं विश्वास का केंद्र बिंदु बना हुआ है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु मनोवांछित कामना करके आता है। कोई मनौती मानने आता है तो कोई मनौती पूर्ण होने पर सोहारी और लप्सी चढ़ाता है। यहां वर्षभर शादी-विवाह, मुंडन और जनेऊ संस्कार भी होते रहते हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्र में इतनी ज्यादा भीड़ हो जाती है कि स्थल कम पड़ जाता है।

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शक्तिपीठ में वैसे को बारहों मास बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, लेकिन नवरात्र में रेला उमड़ता है। पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों के हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन व कड़ाही चढ़ाते हैं। यहां दर्शन के बाद विंध्याचल धाम को रवाना होते हैं। पर्व की तैयारी कर ली गई है।

शक्तिपीठ परिसर में साफ-सफाई का कार्य पूर्ण करा लिया गया है। श्रद्धालुओं को बिजली, पानी की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। प्रशासन से पर्याप्त पुलिस बल की मांग की गई है। धाम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर 14 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। जहां से लाउडस्पीकर के माध्यम से दर्शनार्थियों की सहायता की जाएगी।

शारदीय नवरात्र में भोर में पांच बजे प्रथम आरती शुरू की जाएगी। 15 मिनट बाद दर्शनार्थियों के लिए मंदिर का कपाट खोल दिया जाएगा। दूसरी आरती अपराह्न 2.30 बजे और तीसरी आरती रात नौ बजे होगी। पर्व पर शादी-विवाह, मुंडन, जनेऊ आदि कार्यक्रम मंदिर परिसर में संपन्न कराए जाएंगे।

-शिव कुमार पंडा, पुजारी


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