धन्य है राम जन्म भूमि | श्रीराम के जन्मस्थल की पवित्रता और महिमा
“धन्य है राम जन्म भूमि” — यह वाक्य केवल गर्व का नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक है। अयोध्या, वह पवित्र भूमि जहाँ भगवान विष्णु ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में अवतार लिया, सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा का स्थान है। यह भूमि धर्म, सत्य और करुणा का संदेश देती है। जब भक्त इस जन्मभूमि की महिमा का गुणगान करता है, तो उसका हृदय भक्ति और गर्व से भर जाता है। यह भक्ति भजन हमें अपने मूल संस्कारों और ईश्वर के प्रति समर्पण की याद दिलाता है।

धन्य है राम जन्म भूमि,
जहा राम ने जन्म लियो,
रघुकुलनन्दन के रूप मे,
विस्नु ने अबतार लीयो…………
धन्य है दसरथ राजा,
धन्य है कौसल्या माता,
धन्य अयोध्या नगरी,
सबके मन मे हर्ष समाता,
प्रगट हुए राम लला,
सबको राम ने धन्य कियो……….
राम नाम है सबसे साचा,
जो भवसागर से पार कराता,
राम नाम की महिमा,
सुख शांति सबको दिलाता,
अंतकाल में हर प्राणी,
राम नाम को जप कियो…………
विधि
- तैयारी: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और अपने पूजाघर को सजाएँ।
- आराधना स्थल: श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएँ।
- प्रारंभिक स्मरण: “श्रीराम जय राम जय जय राम” मंत्र का तीन बार जप करें।
- भजन आरंभ करें: शांत मन से बैठकर “धन्य है राम जन्म भूमि” भजन को श्रद्धा और प्रेम से गाएँ या सुनें।
- भावना: हर पंक्ति गाते समय अयोध्या की पवित्रता और प्रभु श्रीराम की कृपा को मन में महसूस करें।
- समापन: भजन समाप्ति पर प्रभु से प्रार्थना करें — कि हमारे जीवन में भी उनके जैसे धर्म, करुणा और मर्यादा का पालन हो।
लाभ
- भक्ति और गर्व की भावना: अपने धर्म और संस्कृति के प्रति श्रद्धा गहराती है।
- मानसिक शांति: मन में ईश्वर के प्रति प्रेम और स्थिरता आती है।
- आध्यात्मिक ऊर्जा: प्रभु श्रीराम की कृपा से आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- घर में सकारात्मकता: यह भजन गाने या सुनने से घर का वातावरण पवित्र और शांत होता है।
- संस्कारों की प्रेरणा: यह भाव नई पीढ़ी को धर्म, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
निष्कर्ष
“धन्य है राम जन्म भूमि” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की भावनाओं का प्रतीक है। यह भूमि हमें यह सिखाती है कि धर्म, प्रेम और न्याय के बिना जीवन अधूरा है। जब हम इस पवित्र स्थान का स्मरण करते हैं, तो हमारी आत्मा में गर्व, भक्ति और शांति का संगम होता है। आइए, हम सब अपने जीवन में श्रीराम के आदर्शों को अपनाएँ और उनके नाम की महिमा को फैलाएँ — क्योंकि सच में, धन्य है वह भूमि जहाँ स्वयं भगवान श्रीराम ने जन्म लिया। 🌸

