आना अंजनी के लाल हमारे हरि कीर्तन में | भक्त और प्रभु के मिलन की मधुर पुकार
“आना अंजनी के लाल हमारे हरि कीर्तन में” — यह पंक्ति एक भक्त की उस हृदयस्पर्शी भावना का प्रतीक है, जहाँ वह अंजनी पुत्र हनुमान जी से निवेदन करता है कि वे उसके हरि-कीर्तन में पधारें। भक्त जानता है कि जहाँ भी प्रभु का नाम गाया जाता है, वहाँ हनुमान जी अवश्य आते हैं। यह भाव हमें भक्ति की उस गहराई में ले जाता है जहाँ ईश्वर से मिलने की लालसा सच्चे प्रेम में बदल जाती है। यह सिर्फ गीत नहीं, बल्कि श्रद्धा और समर्पण का निमंत्रण है।

आओ जी आओ जी हनुमान,
आना पवन कुमार हमारे हरि कीर्तन में,
आना अंजनी के लाल हमारे हरि कीर्तन में,
आप भी आना संग राम जी को लाना,
राम जी को लाना जी राम जी को लाना,
लाना जकन दुलार हमारे हरि कीर्तन में,
आना पवन कुमार हमारे हरि कीर्तन में….
भरत जी को लाना लक्ष्मण जी को लाना,
लक्ष्मण जी को लाना जी लक्ष्मण जी को लाना,
लाना सब परिवार हमारे हरि कीर्तन में,
आना पवन कुमार हमारे हरि कीर्तन में….
कृष्ण जी को लाना राधा जी को लाना,
राधा जी को लाना जी राधा जी को लाना,
लाना शिव परिवार हमारे हरि कीर्तन में,
आना पवन कुमार हमारे हरि कीर्तन में….
विष्णु जी को लाना नारद जी को लाना,
नारद जी को लाना संग नारद जी को लाना,
बाजे वीणा के तार हमारे हरि कीर्तन में,
आना पवन कुमार हमारे हरि कीर्तन में…..
सुमति को लाना और कुमति को हटाना,
कुमति को हटाना जी कुमति को हटाना,
कर दो बेडा पार हमारे हरि कीर्तन में,
आना पवन कुमार हमारे हरि कीर्तन में….
बजरंग मंडल पे कृपा करके,
कृपा करके कृपा करके,
सुन लो नाथ पुकार हमारे हरि कीर्तन में,
आना पवन कुमार हमारे हरि कीर्तन में……
विधि
- स्थान की तैयारी: घर या मंदिर को स्वच्छ कर भक्ति स्थल को सजाएँ।
- दीप प्रज्वलन: हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाएँ।
- स्मरण: “जय हनुमान ज्ञान गुन सागर” कहते हुए मन को एकाग्र करें।
- कीर्तन प्रारंभ: भक्ति भाव से “आना अंजनी के लाल हमारे हरि कीर्तन में” पंक्ति का गान करें।
- भावना: कल्पना करें कि अंजनी पुत्र स्वयं पवन की तरह वहाँ पधार रहे हैं और भक्ति का वातावरण सुगंधित कर रहे हैं।
- समापन: अंत में हनुमान चालीसा या हनुमान आरती का पाठ करें और धन्यवाद अर्पित करें।
लाभ
- भक्ति में ऊर्जा: कीर्तन में अपार शक्ति और उत्साह का अनुभव होता है।
- आध्यात्मिक उपस्थिति: ऐसा महसूस होता है मानो हनुमान जी स्वयं पधारकर आशीर्वाद दे रहे हों।
- सकारात्मक वातावरण: घर या मंदिर में शांति और पवित्रता का संचार होता है।
- संकट निवारण: हनुमान जी की कृपा से जीवन के भय और बाधाएँ दूर होती हैं।
- मन की एकाग्रता: ईश्वर के नाम में डूबने से मन स्थिर और निर्मल होता है।
निष्कर्ष
“आना अंजनी के लाल हमारे हरि कीर्तन में” — यह पंक्ति केवल प्रार्थना नहीं, बल्कि भक्ति का सजीव आमंत्रण है। जब भक्त सच्चे मन से पुकारता है, तो अंजनी पुत्र हनुमान जी अवश्य आते हैं, क्योंकि वे हर उस स्थान पर उपस्थित रहते हैं जहाँ प्रभु श्रीराम का नाम लिया जाता है। इस भावना से भरा हर कीर्तन न केवल संगीत, बल्कि आत्मा की शुद्धि का माध्यम बन जाता है।

