बालाजी बल्ले बल्ले | श्रद्धा, ऊर्जा और आनंद का दिव्य संगम

“बालाजी बल्ले बल्ले” — यह पंक्ति बालाजी महाराज के भक्ति रस में डूबे भक्तों का उल्लासपूर्ण उद्घोष है। जब भक्त प्रभु का नाम हर्ष से लेते हैं, तो उनके जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं। बालाजी महाराज केवल संकटमोचन ही नहीं, बल्कि आनंद और शक्ति के स्रोत भी हैं। “बल्ले बल्ले” कहना इस भावना का प्रतीक है कि प्रभु की कृपा से जीवन में हर चुनौती उत्सव बन जाती है। यह पंक्ति भक्ति को केवल शांति ही नहीं, बल्कि जोश और उमंग से भी जोड़ती है।

rajeshswari

मैनु रखलो सेवादार बाला जी होजे बल्ले बल्ले,
रज रज के करा दीदार बाला जी होजे बल्ले बल्ले……

कई साला तो मैं अर्जी लगाई होई है,
हूँ गल तुहदि मर्जी ते आई होई है,
ना न करियो सरकार बाला जी होजे बल्ले बल्ले,
मैनु रखलो सेवादार बाला जी होजे बल्ले बल्ले……

सत आरतियां रोज मैं उतारा बाला जी,
सत मिर्चा मैं लाल सिरों वारा बाला जी,
रोज सत वरि करा शृंगार,
बाला जी हो जे बल्ले बल्ले,
मैनु रखलो सेवादार बाला जी होजे बल्ले बल्ले…….

तुहाडे भगता दियां साम्ब साम्ब रखा जोड़ियां,
धोवा उठके सवेरे मंदिरा दिया पौड़ियां,
तुहाडे प्यार वाली मिल जे पगार,बाला जी होजे बल्ले बल्ले,
मैनु रखलो सेवादार बाला जी होजे बल्ले बल्ले……

भाव से पूजा या भजन करने की विधि

  1. स्थान और तैयारी: मंगलवार या शनिवार को बालाजी महाराज के मंदिर या घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
  2. दीपक और धूप जलाएँ: बालाजी जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक, लाल फूल और गुड़-चना अर्पित करें।
  3. प्रारंभ: “जय बालाजी महाराज” तीन बार बोलें और मन को एकाग्र करें।
  4. भजन या जप: हर्ष और उमंग के साथ “बालाजी बल्ले बल्ले” भजन गाएँ या सुनें।
  5. भावना रखें: मन में यह अनुभव करें कि बालाजी जी आपकी हर समस्या को हल कर रहे हैं और आपको आशीर्वाद दे रहे हैं।
  6. समापन: अंत में “हनुमान चालीसा” का पाठ करें और प्रसाद बाँटें।
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इस भक्ति भाव से मिलने वाले लाभ

  • संकट से रक्षा: बालाजी महाराज अपने भक्तों के सारे कष्ट दूर करते हैं।
  • साहस और आत्मबल: हनुमान जी की कृपा से मन में अद्भुत शक्ति और आत्मविश्वास आता है।
  • सकारात्मक सोच: जीवन में उत्साह और आनंद बना रहता है।
  • भक्ति और समर्पण: प्रभु के प्रति गहरा विश्वास और प्रेम विकसित होता है।
  • घर में शांति: वातावरण पवित्र और ऊर्जा से भर जाता है।

निष्कर्ष

“बालाजी बल्ले बल्ले” — यह पंक्ति केवल भक्ति का गान नहीं, बल्कि आनंद और आभार का उत्सव है। जब हम प्रभु का नाम उल्लास से लेते हैं, तो जीवन के सारे दुख, भय और भ्रम मिट जाते हैं। यह भाव हमें सिखाता है कि प्रभु के प्रति सच्ची श्रद्धा और मुस्कान सबसे बड़ी पूजा है।

Shiv murti

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