मेरे भोले बाबा ने वियाह रचाया | शिव–शक्ति के दिव्य मिलन की पावन कथा

मेरे भोले बाबा ने वियाह रचाया | शिव–शक्ति के दिव्य मिलन की पावन कथा

मेरे भोले बाबा ने वियाह रचाया यह पंक्ति भगवान शिव और माता पार्वती के उस दिव्य विवाह का स्मरण कराती है, जिसने सृष्टि में प्रेम, संतुलन और सौंदर्य का संचार किया। यह विवाह केवल दो रूपों का नहीं, बल्कि दो शक्तियों का मिलन था — एक योग और वैराग्य का, और दूसरा प्रेम और करुणा का। जब हम इस दिव्य घटना को स्मरण करते हैं, तो मन में यह भाव जाग्रत होता है कि जीवन में भी ईश्वर का संग और आशीर्वाद सबसे बड़ा सुख है। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चा प्रेम संयम, समर्पण और श्रद्धा में बसता है।

rajeshswari

मेरे, भोले बाबा ने, वियाह रचाया, वियाह रचाया ll
मेरी, गौरां मईया को, दुलहन बनाया, दुलहन बनाया ll

इस शादी की, शान देखकर, राम ने ङंका बजाया ll
सीता जी को, साथ नचा कर, खूब धमाल मचाया l
मेरे, भोले बाबा ने, वियाह रचाया…

इस शादी की, शान देखकर, विष्णु ने शंख बजाया ll
लक्ष्मी माँ को, साथ नचाकर, खूब धमाल मचाया l
मेरे, भोले बाबा ने, वियाह रचाया…

इस शादी की, शान देखकर, शाम ने मुरली बजाई ll
झूम झूम के, नाचे और, राधा साथ नचाई l

इस शादी की, शान देखकर, ब्रह्मा ने वेद सुनाऐ ll
ब्रह्माणी को, साथ लै आऐ, कारज नेक कराऐ l
मेरे, भोले बाबा ने, वियाह रचाया…

इस शादी की, शान देखकर, मईया दौङी आई ll
हनुमत ने भी, नाच नाच कर, चुटकी खूब बजाई lमहाँदेव
मेरे, भोले बाबा ने, वियाह रचाया…

ऐसा दूल्हा, कहीं ना देखा, देखी ना ऐसी दुलहन ll
शिव गौरां की*, जोड़ी जग में, बनी है सबसे उतम l
मेरे, भोले बाबा ने, वियाह रचाया…

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हर हर महादेव

भाव से पूजन या ध्यान विधि

  1. दिन: सोमवार या शिवरात्रि का दिन इस भावना से पूजा के लिए उत्तम है।
  2. स्थान: घर के मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र रखें।
  3. सामग्री: फूल, धूप, दीपक, बेलपत्र, गंगाजल, फल और मिठाई।
  4. प्रारंभ: “ॐ नमः शिवाय” का पाँच बार जप करें।
  5. पूजन: भगवान शिव और माता पार्वती को जल अर्पित करें, उनके विवाह का स्मरण करते हुए यह भाव रखें कि आप भी उस पावन उत्सव के साक्षी हैं।
  6. भजन या पाठ: “मेरे भोले बाबा ने वियाह रचाया” भजन या शिव विवाह की कथा श्रद्धा से सुनें या गाएँ।
  7. समापन: हाथ जोड़कर प्रार्थना करें — “हे शिव–शक्ति, हमारे जीवन में भी आपका प्रेम और कृपा बनी रहे।”

इस भक्ति से मिलने वाले लाभ

  • दांपत्य जीवन में प्रेम और समरसता: शिव–पार्वती के विवाह का स्मरण पति-पत्नी के बीच सौहार्द लाता है।
  • मन की शांति और स्थिरता: भक्ति से मन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है।
  • संकटों का निवारण: भगवान शिव की कृपा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
  • प्रेम और श्रद्धा की वृद्धि: भक्त के हृदय में प्रेम और समर्पण की भावना प्रबल होती है।
  • आध्यात्मिक सुख: आत्मा को ईश्वर के प्रेम का अनुभव होता है।

निष्कर्ष

मेरे भोले बाबा ने वियाह रचाया यह पंक्ति केवल एक भजन नहीं, बल्कि उस दिव्यता का स्मरण है जहाँ शिव और शक्ति ने सृष्टि के लिए प्रेम और संतुलन का आदर्श प्रस्तुत किया। उनके इस विवाह में भक्ति, प्रेम और समर्पण का अमृत समाया है। जब हम इस भाव से उन्हें स्मरण करते हैं, तो हमारे जीवन में भी मधुरता और शांति का संचार होता है। यह कथा हमें याद दिलाती है कि जब प्रेम में विनम्रता और भक्ति होती है, तब वह सृष्टि को भी पवित्र बना देती है।

Shiv murti

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