तुम्हारे नाम का सुमिरन | प्रभु के नाम में छिपा है शांति, शक्ति और मुक्ति का रहस्य

तुम्हारे नाम का सुमिरन | प्रभु के नाम में छिपा है शांति, शक्ति और मुक्ति का रहस्य

तुम्हारे नाम का सुमिरन केवल एक भक्ति भाव नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार है। जब जीवन में अंधकार छा जाता है, तब ईश्वर का नाम ही वह दीपक बनता है जो हमें सही मार्ग दिखाता है। प्रभु का नाम जप मन की अशांति को दूर करता है और हमें आंतरिक शांति प्रदान करता है। यह भाव हमें सिखाता है कि हर सांस में प्रभु का नाम बसाने से जीवन सरल और सुखमय हो जाता है। सच्चा भक्त वही है जो हर परिस्थिति में कह सके — “मेरे प्रभु, तुम्हारे नाम का सुमिरन ही मेरी सबसे बड़ी साधना है।”

rajeshswari

तुम्हारे नाम का सुमिरन करता रहूं मैं हर पल हर घड़ी,
जो करो दया तुम मुझ पर तुम्हारी कृपा होगी बड़ी….

एकदंत हे करुणाकर तुम हो बुद्धि बल के स्वामी,
तीनों लोकों में है तुम्हारी सत्ता हो तुम अंतर्यामी,
तुम हो प्रथम पूजीय सब तुम्हारा ही गुण हैं गाते,
शीश झुका कर चरणों में मन वांछित फल हैं पाते,
जो करो दया तुम मुझ पर तुम्हारी कृपा होगी बड़ी,
तुम्हारे नाम का सुमरन करता रहूं मैं हर पल हर घड़ी…..

गज रूप तुम्हारा आनन है गजानन जग से न्यारा,
सबके मन को है भाता लम्बोदर सौम्य रूप तुम्हारा,
रिद्धि सिद्धि के भर्ता सुख कर्ता तुम हो जन नायक,
सब विधान है तुम्हारा हो तुम विधि के विधायक,
जो करो दया तुम मुझ पर तुम्हारी कृपा होगी बड़ी,
तुम्हारे नाम का सुमरन करता रहूं मैं हर पल हर घड़ी…..

है गले में तुम्हारे पुष्प माला धारो तुम माथे चंदन,
शीश मुकुट धरा तुम्हारे शीश झुका करते सब वंदन,
जन जन के हृदय में बसने वाले तुम सबका हित करते,
जो श्रद्धा भाव से तुमको ध्याते उनके कष्ट सब हरते,
जो करो दया तुम मुझ पर तुम्हारी कृपा होगी बड़ी,
तुम्हारे नाम का सुमरन करता रहूं मैं हर पल हर घड़ी…..

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नाम सुमिरन करने का सरल तरीका

  1. समय: प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त या रात्रि में सोने से पहले का समय सबसे शुभ होता है।
  2. स्थान: शांत, स्वच्छ और पवित्र वातावरण में बैठें।
  3. सामग्री: केवल मन की एकाग्रता और श्रद्धा आवश्यक है।
  4. क्रम:
    • नेत्र बंद करें और गहरी सांस लें।
    • मन में अपने आराध्य का चित्र स्मरण करें।
    • धीरे-धीरे उनका नाम जपें, जैसे “राम”, “कृष्ण”, “शिव”, “गणेश” या अपने विश्वास के अनुसार किसी भी ईश्वर का नाम।
    • यदि चाहें तो माला लेकर 108 बार जप करें।
  5. भाव: नाम सुमिरन करते समय मन में प्रेम, विश्वास और आभार का भाव रखें — यह केवल उच्चारण नहीं, बल्कि आत्मा का संवाद है।

प्रभु नाम सुमिरन से मिलने वाले शुभ फल

  • मन की अशांति और तनाव समाप्त होता है।
  • आत्मिक शांति, सकारात्मकता और विश्वास बढ़ता है।
  • जीवन में सद्भाव, संतोष और स्थिरता आती है।
  • कठिनाइयों में साहस और धैर्य का संचार होता है।
  • ईश्वर की कृपा और मार्गदर्शन का अनुभव होता है।

निष्कर्ष

“तुम्हारे नाम का सुमिरन” जीवन की हर परिस्थिति में हमें संभालने की शक्ति देता है। जब हम प्रभु का नाम लेते हैं, तो वह केवल जप नहीं रहता — वह हमारे जीवन का संगीत बन जाता है। यह हमें भीतर से मजबूत और बाहर से शांत बनाता है। सच्चा आनंद और स्थिरता तब मिलती है जब हम हर पल ईश्वर के नाम में खो जाते हैं। इसलिए दिन की शुरुआत और अंत हमेशा इस भाव से करें — “हे प्रभु, तुम्हारे नाम का सुमिरन ही मेरा सबसे बड़ा संबल है।”

Shiv murti

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