दालमंडी चौड़ीकरण: विकास का संकल्प, विनाश का विरोध

दालमंडी चौड़ीकरण: विकास का संकल्प, विनाश का विरोध

वाराणसी (जनवार्ता) । दालमंडी इलाके के चौड़ीकरण परियोजना ने नया मोड़ ले लिया है। एक ओर प्रशासनिक स्तर पर ध्वस्तीकरण और मुआवजे की प्रक्रिया तेज हो रही है, वहीं दूसरी ओर अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने मस्जिदों के संरक्षण को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए चुनौती दे दी है। कमेटी का स्पष्ट संदेश है विकास का स्वागत, लेकिन किसी भी धार्मिक स्थल के विनाश को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना के तहत करीब 650 मीटर लंबी इस सड़क को 17 मीटर चौड़ा किया जाएगा, जो काशी विश्वनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वैकल्पिक और आकर्षक मार्ग साबित होगी। योगी सरकार की महत्वाकांक्षी इस योजना में कुल 187 भवनों का ध्वस्तीकरण प्रस्तावित है। अब तक 25 से अधिक भवन मालिकों ने अपने दस्तावेज जमा कराए हैं, जिनकी जांच के बाद मुआवजा राशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट सतेंद्र कुमार ने बताया, “प्रक्रिया पारदर्शी है। प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि उनका पुनर्वास सुगम हो।”

परियोजना की शुरुआत 19 अक्टूबर को पहली रजिस्ट्री के साथ हुई, जिसके तहत 29 अक्टूबर को ध्वस्तीकरण कार्य आरंभ कर दिया गया। दालमंडी को मॉडल सड़क के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है, जिसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ सौंदर्यीकरण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। यह मार्ग न केवल यातायात को सहज बनाएगा, बल्कि वाराणसी की सांस्कृतिक धरोहर को भी निखारेगा।

हालांकि, इस विकास के बीच अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने प्रभावित दुकानदारों और मकान मालिकों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। शहर मुफ्ती मौलाना बातीन शाह ने दर्जनों पदाधिकारियों के साथ दालमंडी का दौरा किया और प्रभावित लोगों से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम विकास के पक्ष में हैं, लेकिन यह विकास किसी की आस्था या आजीविका का विनाश नहीं कर सकता। दालमंडी में आने वाली मस्जिदों के संरक्षण के लिए हम कानूनी और सामाजिक स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे।” मुफ्ती साहब ने प्रभावित परिवारों को रजिस्ट्री न कराने की सलाह दी और प्रशासन से मांग की कि पहले इनकी रोजी-रोटी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह परियोजना शहर की भीड़भाड़ को कम करने में सहायक होगी, लेकिन धार्मिक स्थलों के संरक्षण की मांग न्यायोचित है। अंजुमन कमेटी के इस रुख से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। डीएम सतेंद्र कुमार ने आश्वासन दिया कि सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। “हम संवाद के जरिए समाधान निकालेंगे, ताकि विकास और संरक्षण दोनों का संतुलन बना रहे,” उन्होंने कहा।

यह विवाद वाराणसी जैसे धार्मिक नगरी में विकास परियोजनाओं के बीच सामाजिक संतुलन की चुनौतियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में पारदर्शिता और संवाद ही अंतिम समाधान है।

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Shiv murti

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