भोले बाबा छोड़ दे इस भांग नशे ने | जहाँ नशा भक्ति का हो, पदार्थों का नहीं
“भोले बाबा छोड़ दे इस भांग नशे ने” यह पंक्ति भक्ति के उस सत्य को उजागर करती है जहाँ इंसान भगवान की भक्ति में डूबकर हर प्रकार के नशे से ऊपर उठता है। भोलेनाथ स्वयं वैराग्य और संयम के प्रतीक हैं — उनका वास्तविक संदेश यह है कि जीवन का असली आनंद आत्मसंयम और प्रेम में है, न कि भौतिक पदार्थों में। यह भक्ति भाव हमें सिखाता है कि सच्चा नशा तो “ॐ नमः शिवाय” के जप में है, जो मन को स्थिर, शांत और ईश्वरमय बना देता है।

छोड़ दे ओ भोले बाबा छोड़ दे,
इस भांग नशे ने छोड़ दे…..
एक दिना मैं गई थी लक्ष्मी धोरे बैठन को,
छिरसागर में विष्णु लेटे, लक्ष्मी पैर दबाती थी,
बोली यू लक्ष्मी हंसकर, मेरे ताना मारा कस के,
छोड़ दे ओ भोले बाबा छोड़ दे,
इस भांग नशे ने छोड़ दे…..
आजा वे पार्वती तने पीढ़े पर बैठाऊगी,
तेरे धोरे खाट को ना सेज पे सुलाऊंगी,
बोली यू लक्ष्मी हंसकर, मेरे ताना मारा कस के,
छोड़ दे ओ भोले बाबा छोड़ दे,
इस भांग नशे ने छोड़ दे…..
आजा पार्वती तने अपना महल दिखाऊंगी,
तेरे धोरे कुछ भी कोना सारे में घूमाऊंगी,
देख ले ऊपर चढ़के, मेरे ताना मारा कस के,
छोड़ दे ओ भोले बाबा छोड़ दे,
इस भांग नशे ने छोड़ दे…..
आजा पार्वती तने अपना खजाना दिखाऊंगी,
तेरे धोरे कुछ भी कोना ताला खोल दिखाऊंगी,
ले जा तू झोली भर के, मेरे ताना मारा कस के,
छोड़ दे ओ भोले बाबा छोड़ दे,
इस भांग नशे ने छोड़ दे…..
शिव आराधना का सच्चा मार्ग
- सुबह स्नान कर शांत मन से शिवलिंग के सामने दीपक जलाएँ।
- गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
- मन में यह संकल्प लें — “हे भोलेनाथ, मुझे सदाचार और संयम का मार्ग दिखाओ।”
- “ॐ नमः शिवाय” या “महामृत्युंजय मंत्र” का 108 बार जप करें।
- इस पंक्ति को भक्ति से दोहराएँ — “भोले बाबा छोड़ दे इस भांग नशे ने, अब तू नाम का नशा दे।”
- अंत में समाज और परिवार की भलाई के लिए प्रार्थना करें।
सच्ची शिव भक्ति के परिणाम
- मन और शरीर में शुद्धता का अनुभव होता है।
- नशे या बुरी आदतों से मुक्ति की प्रेरणा मिलती है।
- जीवन में सकारात्मकता और एकाग्रता बढ़ती है।
- परिवार में सुख-शांति और सामंजस्य बना रहता है।
- आध्यात्मिक उन्नति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
निष्कर्ष
“भोले बाबा छोड़ दे इस भांग नशे ने” यह भक्ति गीत हमें यह याद दिलाता है कि सच्चा भक्त वही है जो ईश्वर के नाम में खो जाता है, न कि नशे में। भक्ति का नशा ऐसा होता है जो आत्मा को पवित्र कर देता है और जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है। जब हम अपने मन को शिव नाम में स्थिर कर लेते हैं, तब हमें किसी बाहरी सहारे की आवश्यकता नहीं रहती। इस भाव से किया गया हर जप, हर स्मरण हमें सच्ची मुक्ति और शांति की ओर ले जाता है।

