तुम तो भोले अस्सी बरस के, मेरी बाली उमरिया

तुम तो भोले अस्सी बरस के, मेरी बाली उमरिया

यह भक्ति गीत भगवान शिव और भक्त के बीच अनंत प्रेम और अपनत्व की झलक दिखाता है। “तुम तो भोले अस्सी बरस के, मेरी बाली उमरिया” यह कहने का भाव यह है कि ईश्वर उम्र, स्थिति या स्वरूप से परे हैं। उनका प्रेम शुद्ध, सहज और निर्मल होता है। भक्त अपने भोलेनाथ से इस गीत के माध्यम से स्नेहपूर्ण संवाद करता है, जिसमें नटखटपन, श्रद्धा और आत्मीयता का संगम है। यह भक्ति का वह भाव है जो हर आयु, हर मनुष्य को भगवान से जोड़ देता है।

rajeshswari

तुम तो भोले अस्सी बरस के, मेरी बाली उमरिया,
बनवाये दे रे भोला मोहि सोने की अटरिया……

इतना सुनकर शिव शंकर ने विश्वर्कमा बुलवाये,
सोने का एक महल बनाया, सोने के कलश धराये,
काग कंगूरे सब सोने के, सोने की किबिड़िया,
बनवाये दे रे भोला मोहि सोने की अटरिया……

शिव और गौरा दोनों मिलकर स्वर्ण महल में आये,
रावण जैसे पंडित ज्ञानी पूजन करने आये,
कैसो सुंदर महल बनो है, ठहरे ना नज़रिया,
बनवाये दे रे भोला मोहि सोने की अटरिया……

किया संकल्प शिव शंकर ने रावण कर फैलाये,
देहु दक्षिणा मुझको स्वामी कारज सफल बनाये,
क्या देदू मैं इस ब्राह्मण को लेजा ये अटरिया,
बनवाये दे रे भोला मोहि सोने की अटरिया……

शिव और गौरा दोनों मिलकर वापिस कैलाश आये,
काशीनाथ कहे जग दाता हमे महल ना भाये,
गौरा बोली साथ चलूंगी तेरी नाथ नगरीया,
ना चाहिए रे भोले मोहि सोने की अटरिया……

भोलेनाथ के प्रति प्रेम भक्ति साधना

  1. प्रातःकाल स्नान कर शिवलिंग या शिव चित्र के समक्ष दीपक जलाएँ।
  2. पुष्प, बेलपत्र और जल अर्पित करें।
  3. शांत मन से यह गीत गाएँ या स्मरण करें — “तुम तो भोले अस्सी बरस के, मेरी बाली उमरिया।”
  4. हर पंक्ति के साथ भगवान से अपने मन की बातें करें — जैसे मित्र या पिता से की जाती हैं।
  5. अंत में शिव से आशीर्वाद माँगें कि वे सदैव प्रेम और करुणा का भाव बनाए रखें।
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इस भक्ति के फल

  • ईश्वर से गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित होता है।
  • मन में निर्मलता, प्रेम और विनम्रता का संचार होता है।
  • भक्ति करते समय मन के क्लेश और तनाव मिट जाते हैं।
  • भोलेनाथ की कृपा से जीवन में संतुलन और सहजता आती है।
  • आत्मा को शांति और स्थिरता का अनुभव होता है।

निष्कर्ष

“तुम तो भोले अस्सी बरस के, मेरी बाली उमरिया” यह भाव हमें सिखाता है कि भक्ति में न उम्र मायने रखती है, न रूप। केवल सच्चा प्रेम ही भगवान तक पहुँचने का मार्ग है। जब भक्त भोलेनाथ से बालसुलभ प्रेम करता है, तब वह उनसे एक आत्मीय संबंध जोड़ लेता है। यह गीत हर भक्त को यह याद दिलाता है कि शिव सदा हमारे अपने हैं — प्रेम, करुणा और सरलता के स्वरूप।

Shiv murti

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