डम डम डमरू बाजे, नाच रहे गण सारे

डम डम डमरू बाजे, नाच रहे गण सारे

“डम डम डमरू बाजे, नाच रहे गण सारे” यह पंक्ति उस दिव्य क्षण की झलक है जब कैलाश पर्वत पर भोलेनाथ अपने डमरू की गूँज से सृष्टि में जीवन का संचार करते हैं। यह केवल संगीत नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रतीक है। जब डमरू की ध्वनि उठती है, तो देवगण नृत्य करते हैं और हर दिशा में आनंद फैल जाता है। यह भाव दर्शाता है कि शिव का नृत्य सृजन और संहार दोनों का प्रतीक है, और यही जीवन का संतुलन सिखाता है।

rajeshswari

डम डम डमरू बाजे नाच रहे गण सारे,
नाच रहे गण सारे नाच रहे गण सारे,
डम डम डमरू बाजे नाच रहे गण सारे…..

महादेव की लीला है न्यारी,
भक्तों पर कृपा है भारी,
जो जपता नमः शिवाय कटे शंकर सारे,
डम डम डमरू बाजे नाच रहे गण सारे…..

जो भोले की पूजा करता,
भोले भंडारी सब की सुनता,
उन्हें मिल जाएं कार्तिक गणेश दूर हो अंधियारे,
डम डम डमरू बाजे नाच रहे गण सारे…..

जो सोमवार का व्रत है करता,
कुंवारी कन्या को मनवांछित फल मिलता,
खुशियां मिले अपार भरे रहे भंडारे,
डम डम डमरू बाजे नाच रहे गण सारे…..

सब मिल बोलो हर हर महादेवा,
जय शिव शंकर जय महादेवा,
होकर मगन मन आज गूंज रहे जयकारे,
डम डम डमरू बाजे नाच रहे गण सारे…..

डमरू नाद स्मरण की साधना

  1. प्रातःकाल या संध्या समय शांत वातावरण में दीपक जलाएँ।
  2. शिवलिंग या शिव चित्र के समक्ष बैठें और मन में यह पंक्ति गुनगुनाएँ —
    “डम डम डमरू बाजे, नाच रहे गण सारे।”
  3. प्रत्येक जप के साथ भगवान शिव के नटराज स्वरूप का ध्यान करें।
  4. यदि संभव हो तो हल्के स्वर में डमरू की ध्वनि करें या “ॐ नमः शिवाय” का जप जोड़ें।
  5. अंत में शिव से प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन में भी आनंद, गति और संतुलन का संचार करें।
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इस भक्ति भाव के चमत्कारी प्रभाव

  • मन और आत्मा में ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है।
  • तनाव, भय और उदासी दूर होकर उत्साह का भाव बढ़ता है।
  • शिव की कृपा से मन की स्थिरता और आत्मबल मिलता है।
  • सृजनात्मकता, साहस और नृत्य जैसी गतिशीलता जीवन में आती है।
  • यह साधना भक्त के भीतर भक्ति और आनंद का दीपक जलाती है।

निष्कर्ष

“डम डम डमरू बाजे, नाच रहे गण सारे” यह केवल गीत नहीं, बल्कि शिव की चेतना का स्पंदन है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन में हर उतार-चढ़ाव उसी नृत्य का हिस्सा है जिसमें सृजन भी है और संहार भी। जब हम इस नाद को भक्ति से दोहराते हैं, तो भीतर की नकारात्मकता मिट जाती है और जीवन में आनंद, संतुलन और भक्ति का संगीत बजने लगता है।

Shiv murti

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