सतगुरु आये घर मेरे | गुरु कृपा का आगमन जीवन का सबसे शुभ क्षण

“सतगुरु आये घर मेरे” यह वाक्य एक सच्चे भक्त के जीवन का सबसे आनंदमय क्षण दर्शाता है। जब गुरु का आगमन होता है, तो घर ही नहीं, हृदय भी पवित्र हो जाता है। गुरु का सान्निध्य ऐसा अमृत है जो मन के अंधकार को मिटाकर प्रकाश फैलाता है।
यह भाव हमें यह सिखाता है कि सच्चा सौभाग्य वही है जब जीवन में गुरु की कृपा उतरती है। उनका आगमन केवल बाहरी नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर जागृति का प्रतीक होता है।

rajeshswari

धन धन नी भाग आज मेरे
सतगुरु आये घर मेरे

नी मैं गऊआ दा दुध मंगानी
ओ सतगुरु नु भोग लगानी
सतगुरु आये आज घर मेरे

धन धन नी भाग आज मेरे
सतगुरु आये ने आज घर मेरे

नी मैं फुल गुलाब दा मंगानी
ओ सतगुरु दे चरनी चढ़ानी
सतगुरु आये ने आज घर मेरे

धन धन नी भाग आज मेरे
ओ सतगुरु आये घर मेरे

नी मैं गंगा दा जल मँगवानी
ओ सतगुरु दे चरण धुलानी
सतगुरु आये ने आज घर मेरे

धन धन नी भाग आज मेरे
सतगुरु आये घर मेरे

नी मैं चन्दन दी चौंकी मंगवानी
ओ सतगुरु नु चौंकी ते बैठानिया
ओ सतगुरु आये आज घर मेरे

धन धन नी भाग आज मेरे
सतगुरु आये घर मेरे

नी मैं भोग वाली थाली मंगवानी आ
ओ अपने गुरा जी नू भोग लगानी आ
ओ सतगुरु आये ने आज घर मेरे

धन धन नी भाग आज मेरे
सतगुरु आये घर मेरे

भाव से पूजन या स्वागत विधि

  1. स्थान: अपने घर के सबसे स्वच्छ और पवित्र स्थान को सजाएँ।
  2. दीपक और फूल: दीपक जलाएँ और सुगंधित फूलों से वातावरण पवित्र करें।
  3. प्रणाम करें: दोनों हाथ जोड़कर मन में कहें — “हे सतगुरु, आपके चरणों में मेरा सारा जीवन समर्पित है।”
  4. भक्ति गीत या मंत्र: “सतगुरु आये घर मेरे” भाव से भजन या मंत्र गाएँ।
  5. सेवा: किसी को भोजन या सहायता देकर गुरु के आगमन की प्रसन्नता साझा करें।
  6. समापन: अंत में गुरु का आशीर्वाद प्राप्त कर मन ही मन कृतज्ञता व्यक्त करें।
इसे भी पढ़े   जय जय शिव दी करदे जाओ | हर हर महादेव – भक्तों के संकट हरने वाले भोलेनाथ

सतगुरु कृपा से मिलने वाले लाभ

  • मन और घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • आध्यात्मिक प्रगति और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
  • जीवन की बाधाएँ धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
  • गुरु का सान्निध्य आत्मबल और विश्वास बढ़ाता है।
  • मन में भक्ति, विनम्रता और आनंद का भाव स्थायी होता है।

निष्कर्ष

“सतगुरु आये घर मेरे” केवल एक खुशी नहीं, बल्कि आत्मा का उत्सव है। जब गुरु हमारे जीवन में आते हैं, तो वे न केवल अज्ञान का अंधकार मिटाते हैं, बल्कि प्रेम और करुणा का दीप भी जलाते हैं। गुरु का आगमन हमें याद दिलाता है कि ईश्वर की सबसे बड़ी कृपा गुरु के रूप में ही मिलती है। सच में, जब सतगुरु हमारे घर आते हैं, तो वह घर नहीं, एक तीर्थ बन जाता है — जहाँ हर श्वास में भक्ति और हर क्षण में आनंद बस जाता है।

Shiv murti

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *