मृत्युदण्ड के उन्मूलन पर जोरदार वाद-विवाद प्रतियोगिता संपन्न
वाराणसी (जनवार्ता) । लोकबन्धु राजनारायण विधि महाविद्यालय में सोमवार को “मृत्युदण्ड का उन्मूलनः क्या यह समय है कि भारत वैश्विक प्रवृत्ति में शामिल हो जाए” विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के संस्थापक निदेशक डॉ. अभिषेक सिंह ने दीप प्रज्वलन कर किया।


प्रतियोगिता में पक्ष और विपक्ष दोनों टीमों ने तर्कपूर्ण ढंग से अपने विचार रखे। **विपक्ष** में दीपेश सिंह ने कहा कि मृत्युदण्ड भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन नहीं करता। आशुतोष मिश्रा ने जेसिका लाल हत्याकांड का उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्य अभियुक्त मनु शर्मा को मृत्युदण्ड न मिलना न्यायपालिका पर कुठाराघात है।
पक्ष में शाष्वत दीक्षित एवं कंचन निषाद ने मृत्युदण्ड के उन्मूलन की वकालत की। उनका तर्क था कि यदि न्यायालय से कोई त्रुटि हो गई तो उसकी भरपाई असंभव है, इसलिए मृत्युदण्ड समाप्त किया जाना चाहिए।
प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए **पक्ष** की ओर से शाष्वत दीक्षित व कंचन निषाद तथा **विपक्ष** की ओर से दीपेश सिंह व आशुतोष मिश्रा को डॉ. अभिषेक सिंह ने स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
समापन भाषण में डॉ. अभिषेक सिंह ने कहा कि भारतीय सामाजिक परिस्थितियों में विरल से विरलतम मामलों में ही मृत्युदण्ड दिया जाना चाहिए। साथ ही पीड़ितों के आश्रितों के लिए कानूनी प्रावधान होने चाहिए ताकि उनका विकास बाधित न हो। उन्होंने छात्रों को भविष्य में ऐसी प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अभिषेक सिंह ने की तथा संचालन करुणामय ने किया। इस अवसर पर डॉ. नीरज पाठक, आलोक कुमार राय, डॉ. सरोज वर्मा, डॉ. विजय कुमार, श्रीमती रेनू, योगेश कुमार सिंह, नरेंद्र देव सिंह, सुनीता, शिव प्रकाश पाण्डेय सहित सभी सेमेस्टर के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

