घर आया मेरा नंदलाला | प्रेम, उल्लास और भक्ति का प्रतीक
“घर आया मेरा नंदलाला” — यह पंक्ति उस असीम आनंद और स्नेह को दर्शाती है जब भगवान कृष्ण अपने भक्तों के घर लौटते हैं। नंदलाल का आगमन केवल घर में खुशी नहीं लाता, बल्कि पूरे हृदय और जीवन को प्रेम, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। यह भाव हमें याद दिलाता है कि ईश्वर का उपस्थित होना केवल भौतिक नहीं, बल्कि मन और आत्मा में भी आनंद और शांति का संचार करता है। भक्त इस पंक्ति में प्रेम और श्रद्धा के साथ अपने नंदलाल को आमंत्रित करता है।

घर, आया, मेरा नंदलाला,
मोर, मुकुट, बँसी वाला ll
घर, आया, मेरा,,,,,,,,,,,,,.
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देवकी, के तुम, ज़ाए हो l
यशोदा, गोद, खिलाए हो ll
नंद, कहे, मेरा नंदलाला,
मोर, मुकुट, बँसी वाला l
घर, आया, मेरा,,,,,,,,,,,,,.
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यमुना, तट पर, जाते हो l
सखियों, के चीर, चुराते हो ll
सखियां, कहे मेरा, गोपाला,
मोर, मुकुट, बँसी वाला l
घर, आया, मेरा,,,,,,,,,,,,,.
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मीरा, बाई, अरज़ करे l
प्रभु, चरणों में, ध्यान धरे ll
अमृत, कर दिया, विष प्याला,
मोर, मुकुट, बँसी वाला l
घर, आया, मेरा,,,,,,,,,,,,,.
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सभा, में द्रोपदी, फ़रियाद करे l
रो, रो के, वोह याद करे ll
चीर, बढ़ा दिया, नंद लाला,
मोर, मुकुट, बँसी वाला l
घर, आया, मेरा,,,,,,,,,,,,,.
भाव से भक्ति करने की विधि
- दिन और समय: जन्माष्टमी या सोमवार, सुबह या संध्या समय श्रेष्ठ है।
- स्थान: घर के पूजा स्थल में कृष्णजी की मूर्ति या लड्डूगोपाल की मूर्ति रखें।
- सामग्री: फूल, तुलसीदल, मिश्री, मक्खन और शुद्ध जल।
- प्रारंभ: “जय श्रीकृष्ण” बोलकर हृदय को शांत करें।
- भजन या जप: प्रेमपूर्वक “घर आया मेरा नंदलाला” भजन गाएँ।
- भावना रखें: कल्पना करें कि नंदलाल आपके घर में प्रवेश कर रहे हैं और आपके जीवन में आनंद का संचार कर रहे हैं।
- समापन: अंत में प्रार्थना करें — “हे नंदलाला, मेरे जीवन को अपनी कृपा, प्रेम और आशीर्वाद से भर दो।”
इस भक्ति से मिलने वाले लाभ
- मन में आनंद और उल्लास: प्रभु के आगमन की भावना से हृदय आनंदित होता है।
- संकटों का निवारण: नंदलाल की कृपा से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
- भक्ति में गहराई: आत्मा ईश्वर के प्रेम और चरणों में लीन होती है।
- सकारात्मक ऊर्जा: घर और परिवार में सुख-समृद्धि का संचार होता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: भक्ति के माध्यम से जीवन का प्रत्येक कर्म पुण्यपूर्ण बन जाता है।
निष्कर्ष
“घर आया मेरा नंदलाला” — यह पंक्ति केवल उत्सव की भावना नहीं, बल्कि भक्ति और प्रेम का जीवंत स्वरूप है। जब हम अपने हृदय में नंदलाल का स्वागत करते हैं, तो जीवन में आनंद, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। उनका आगमन हमें यह याद दिलाता है कि भगवान हमेशा हमारे भीतर हैं, और उनके प्रेम और कृपा से जीवन हर परिस्थिति में सुगम और मधुर बन जाता है।

