फूलों से सजा दो गोकुल को | प्रेम, उल्लास और रासलीला का प्रतीक

“फूलों से सजा दो गोकुल को” — यह पंक्ति ब्रज की गलियों में श्रीकृष्ण के स्वागत और रासलीला के उत्सव का भाव प्रकट करती है। फूल केवल सजावट नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद का प्रतीक हैं। भक्त इस भाव से कल्पना करता है कि गोकुल पूरी तरह से फूलों से भरा हुआ है, और कान्हा के आगमन से हर कोना प्रेम और उल्लास से चमक रहा है। यह भावना मन और आत्मा दोनों को शुद्ध कर देती है और जीवन में आनंद की वर्षा करती है।

rajeshswari

फूलों से, सजा दो, गोकुल को,
मेरा, लल्ला, आने वाला है ll
मेरा, लल्ला, आने वाला है*,
मेरा, लल्ला, आने वाला है l
फूलों से, सजा दो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
^
कोई, काज़ल, की डिबिया, ले आओ,
कोई, काला, धागा ले आओ ll
कहीं, नजर ना, लग जाए, कान्हा को,
मेरा, लल्ला, आने वाला है l
फूलों से, सजा दो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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कोई, सोने का, पालना, ले आओ,
कोई, मखमल की, चादर, ले आओ ll
कोई, झूला, लगा दो, आंगन में,
मेरा, लल्ला, आने वाला है l
फूलों से, सजा दो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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कोई, चांदी का, लोटा, ले आओ,
कोई, सोने की, थाली, ले आओ ll
ज़रा, चरण, धुला दो, लल्‍ला के,
मेरा, लल्ला, आने वाला है l
फूलों से, सजा दो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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कोई, माखन, मिश्री, ले आओ,
कोई, लड्डू, पेड़े, ले आओ ll
ज़रा, भोग, लगा दो, लल्‍ला को,
मेरा, लल्ला, आने वाला है l
फूलों से, सजा दो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
^
कोई, ढोल, नगाड़े, बजाओ रे,
कोई, मंगल, गाने, गाओ रे ll
कोई, कान्हा की, जय जयकार करो,
मेरा, लल्ला, आने वाला है l
फूलों से, सजा दो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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कोई, नंद, महल को, सजायो रे,
कोई, घी के, दीए, जलायो रे ll
सब, मिल के, खुशियाँ, मनाओ रे,
मेरा, लल्ला, आने वाला है l
फूलों से, सजा दो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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भाव से भक्ति करने की विधि

  1. दिन और समय: जन्माष्टमी, सोमवार या शुक्रवार का दिन श्रेष्ठ है।
  2. स्थान: घर या मंदिर में कृष्णजी की मूर्ति या लड्डूगोपाल स्थापित करें।
  3. सामग्री: रंग-बिरंगे फूल, तुलसीदल, शुद्ध जल, और दीपक।
  4. प्रारंभ: “जय श्रीकृष्ण” बोलकर हृदय को शांत करें।
  5. भजन या जप: प्रेमपूर्वक “फूलों से सजा दो गोकुल को” भजन गाएँ।
  6. भावना रखें: कल्पना करें कि गोकुल की गलियाँ फूलों से सजी हैं और कान्हा वहां अपने प्रेम से रास रच रहे हैं।
  7. समापन: अंत में प्रार्थना करें — “हे कान्हा, मेरे जीवन और घर में भी फूलों की तरह प्रेम और खुशी बरसाओ।”

इस भक्ति से मिलने वाले लाभ

  • मन में आनंद और प्रसन्नता: फूलों का प्रतीक प्रेम और भक्ति से मन में उल्लास भरता है।
  • संकटों से मुक्ति: श्रीकृष्ण की कृपा से जीवन की कठिनाइयाँ सरल हो जाती हैं।
  • भक्ति में गहराई: आत्मा ईश्वर के प्रेम और चरणों में लीन हो जाती है।
  • घर में सौभाग्य और खुशियाँ: फूलों की तरह हर कोना प्रेम और आनंद से भर जाता है।
  • आध्यात्मिक ऊर्जा: भक्ति जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति लाती है।

निष्कर्ष

“फूलों से सजा दो गोकुल को” — यह पंक्ति केवल उत्सव की भावना नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। जब हम इस भाव से अपने हृदय और घर को श्रीकृष्ण के स्वागत के लिए सजाते हैं, तो जीवन में उल्लास, शांति और प्रेम का प्रकाश फैल जाता है। फूलों से सजी गोकुल की कल्पना हमें यह सिखाती है कि भक्ति में प्रेम और सौंदर्य की अनुभूति जीवन को पूर्ण बनाती है।

Shiv murti

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