इतना सस्ता और न सौदा दुनिया के बाजार में

इतना सस्ता और न सौदा दुनिया के बाजार में

“इतना सस्ता और न सौदा दुनिया के बाजार में” — यह पंक्ति हमें जीवन का गूढ़ सत्य सिखाती है। संसार के बाज़ार में सब कुछ मूल्य पर मिलता है, परंतु ईश्वर का प्रेम, भक्ति और कृपा ऐसी चीजें हैं जिन्हें केवल सच्चे मन और श्रद्धा से पाया जा सकता है। इस भाव में हमें यह एहसास होता है कि भगवान के नाम का जप ही सबसे बड़ा खज़ाना है। धन-दौलत और शोहरत मिट सकती है, परंतु ईश्वर की भक्ति अमर रहती है। यही वह सौदा है जो जीवन को अर्थ और आत्मा को शांति देता है।

rajeshswari

इतना सस्ता और ना सौदा,
दुनिया के बाजार में,
तीन लोक का मालिक बिकता,
बस थोड़े से प्यार में,
तीन लोक का स्वामी बिकता,
बस थोड़े से प्यार में।।

आंच ना आने दे भक्तो पे,
सारे गम खुद ही पी ले,
सर पे रखता हाथ
कभी ना,होने दे नैना गिले,
ऐसा दिन दयालु दाता,
मिले नहीं संसार में,
तीन लोक का मालिक बिकता,
बस थोड़े से प्यार में,
तीन लोक का स्वामी बिकता,
बस थोड़े से प्यार में।।

आँखों में आंसू भर के,
जब कोई इन्हें बुलाता है,
इतना हल्का है आंसू की,
बूंदों में बह आता है,
शर्त यही है सच्चाई हो,
उसकी करुण पुकार में,
तीन लोक का मालिक बिकता,
बस थोड़े से प्यार में,
तीन लोक का स्वामी बिकता,
बस थोड़े से प्यार में

जब भी कोई दर्द में भिगी,
अपनी दशा सुनाता है,
उसकी आहें सुनकर श्याम का,
दिल घायल हो जाता है,
हारे का बस एक सहारा,
ना और कोई संसार में,
तीन लोक का मालिक बिकता,
बस थोड़े से प्यार में,
तीन लोक का स्वामी बिकता,
बस थोड़े से प्यार में।।

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इतना सस्ता और ना सौदा,
दुनिया के बाजार में,
तीन लोक का मालिक बिकता,
बस थोड़े से प्यार में,
तीन लोक का स्वामी बिकता,
बस थोड़े से प्यार में

भक्ति करने की सरल विधि

  1. समय: प्रातः या संध्या का समय सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
  2. स्थान: किसी शांत स्थान पर दीपक जलाकर ईश्वर के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  3. सामग्री: केवल सच्चा मन और श्रद्धा — यही सबसे बड़ा साधन है।
  4. प्रारंभ: कुछ क्षण मन को शांत करें और ईश्वर के नाम का स्मरण करें।
  5. जप या भजन: “इतना सस्ता और न सौदा दुनिया के बाजार में” भाव से गाएँ या मन ही मन दोहराएँ।
  6. समापन: ईश्वर से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में सच्ची भक्ति और संतोष की भावना बनी रहे।

इस भक्ति भाव से मिलने वाले लाभ

  • संतोष का भाव जागता है: व्यक्ति छोटी चीज़ों में भी ईश्वर का आशीर्वाद महसूस करता है।
  • मन की अशांति दूर होती है: भक्ति से मन को गहरी शांति मिलती है।
  • अहंकार मिटता है: व्यक्ति को समझ आता है कि भक्ति धन से नहीं, भाव से मिलती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है: श्रद्धा और प्रेम से जीवन में आनंद आता है।
  • ईश्वर कृपा प्राप्त होती है: सच्चे मन से भक्ति करने पर भगवान स्वयं अपने भक्त के करीब आते हैं।

निष्कर्ष

“इतना सस्ता और न सौदा दुनिया के बाजार में” हमें यह सिखाता है कि भक्ति का मूल्य किसी संसारिक वस्तु से नहीं आँका जा सकता। यह सौदा प्रेम और श्रद्धा का है, जो हर उस हृदय को अनमोल बना देता है जहाँ ईश्वर बसते हैं। जब हम सच्चे मन से उनका नाम जपते हैं, तो जीवन की हर कठिनाई सरल लगने लगती है। सच्ची भक्ति ही वह अमूल्य धन है जो कभी खोता नहीं, बस बाँटने से और बढ़ता है।

Shiv murti

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