काशी तमिल संगमम्-4.0 : विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में “एकता की गंगा” नुक्कड़ नाटक ने बांधा समां
वाराणसी (जनवार्ता) । काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में आज काशी तमिल संगमम् 4.0 के तहत “एकता की गंगा” नुक्कड़ नाटक का भव्य मंचन हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार करता यह कार्यक्रम भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और आईआईटी (बीएचयू) के सौजन्य से आयोजित किया गया।


नोडल अधिकारी प्रो. अंचल श्रीवास्तव के निर्देशन में तैयार इस नाटक ने काशी और तमिलनाडु की साझा सांस्कृतिक-आध्यात्मिक विरासत को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक का मूल संदेश था – भले ही भाषा, भूगोल और परंपराएं अलग दिखें, लेकिन भावनात्मक और सांस्कृतिक धरातल पर भारत एक ही धारा में बहता है, ठीक गंगा की तरह।

मुख्य भूमिका में सागर शॉ ने दमदार अभिनय किया। उनके साथ मिनर्वा राइज़ादा, मेहुल अपराजिता, अद्रीजा रॉय, अनुभा सिंह, हिमांशु गुप्ता, प्रिंस राज, अंकित कुमार ओझा, देवांश पंचारिया और रक्षित मिश्रा ने शानदार प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर दृश्य में संवाद, भाव-भंगिमा और संगीत का ऐसा समन्वय था कि दर्शक देर तक तालियां बजाते रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. अंचल श्रीवास्तव ने कहा, “नाटक समाज को जोड़ने और जागरूक करने का सबसे जीवंत माध्यम है। काशी तमिल संगमम् जैसे आयोजन हमारी नई पीढ़ी को यह समझा रहे हैं कि हम सब एक ही सांस्कृतिक परिवार के अंग हैं और गंगा की तरह हमारी एकता शाश्वत है।”
बड़ी संख्या में जुटे दर्शकों ने प्रस्तुति की भरपूर सराहना की। “एकता की गंगा” ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में छिपी एकता है। यह नाटक काशी तमिल संगमम्-4.0 का अब तक का सबसे यादगार आयोजन बन गया।

