रामनगर किला: टिनशेड हटाने पर उठा विवाद, पुलिस ने रोका काम; दो मजदूर हिरासत में
परिवारिक मतभेद फिर सतह पर, कोर्ट के स्टे आदेश का भी सवाल

वाराणसी (जनवार्ता) | रामनगर किले में मंगलवार शाम टिनशेड बदलने के कार्य को लेकर परिवार के अंदर एक बार फिर विवाद भड़क गया। काशी की ऐतिहासिक विरासत और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र यह किला अक्सर पारिवारिक मतभेदों और प्रबंधन संबंधी सवालों को लेकर सुर्खियों में रहता है। मंगलवार का विवाद इसी कड़ी को एक बार फिर गहरा कर गया है।
जानकारी के अनुसार किले के बाहर पुराने और जर्जर टिनशेड को हटाकर नया टिनशेड लगाने का काम चल रहा था। इसी दौरान काशी नरेश विभूतिनारायण सिंह की पुत्री कृष्ण प्रिया और उनके भाई अनंत नारायण सिंह के पक्ष में शामिल लोगों के बीच कहासुनी शुरू हुई। मामला बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची और वहां काम कर रहे दो मजदूरों को हिरासत में ले लिया।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब कृष्ण प्रिया के पुत्र वल्लभ नारायण सिंह के सुरक्षा कर्मियों और अनंत नारायण सिंह के कर्मचारियों के बीच भी तीखी नोकझोंक हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार माहौल कुछ देर तक काफी तनावपूर्ण रहा और पुलिस को हस्तक्षेप करके दोनों पक्षों को शांत कराना पड़ा।
कृष्ण प्रिया ने कहा कि विश्व संस्कृत प्रतिष्ठानम के बाहर लगाया गया टिनशेड कई वर्षों से खराब हालत में था और उसे बदलना आवश्यक था। उनका कहना है कि कोई नया निर्माण नहीं हो रहा था, केवल पुराने, टूटे हुए टिनशेड को बदला जा रहा था। इसके बावजूद अनावश्यक रूप से विवाद खड़ा किया गया और पुलिस का उपयोग दबाव बनाने के लिए किया गया।
इसके विपरीत, अनंत नारायण सिंह के सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार शर्मा ने दावा किया कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और कोर्ट ने किसी भी तरह के नए निर्माण पर रोक लगाई हुई है। उनका आरोप है कि कृष्ण प्रिया द्वारा आदेश की अवहेलना करते हुए निर्माण कार्य कराया जा रहा था और रोकने पर उनके कर्मचारियों को धमकियां दी गईं।
थाना प्रभारी दुर्गा सिंह ने बताया कि यह विवाद भले ही पारिवारिक है, लेकिन स्थान ऐतिहासिक होने के कारण कोई भी गतिविधि संवेदनशील मानी जाती है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने पहुंचकर काम रुकवाया और दोनों पक्षों को स्पष्ट कर दिया कि कोर्ट के आदेशों के खिलाफ कोई भी निर्माण या बदलाव नहीं होने दिया जाएगा।
रामनगर किले में इससे पहले भी मरम्मत, संरक्षण और अधिकारों को लेकर कई बार विवाद सामने आ चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार होते ऐसे विवाद न केवल किले की छवि को प्रभावित करते हैं, बल्कि इसके संरक्षण कार्यों पर भी प्रभाव डालते हैं।
अब सबकी नजरें न्यायालय के आगामी निर्णय पर टिकी हैं कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या किले की दीवारों में उपजा यह तनाव शांत होता है या आने वाले दिनों में फिर नया मोड़ ले लेता है।

