50 स्कूलों में  ‘तमिल कर्कलम’ कक्षाएं सफलतापूर्वक संपन्न

50 स्कूलों में  ‘तमिल कर्कलम’ कक्षाएं सफलतापूर्वक संपन्न

वाराणसी (जनवार्ता): काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक व शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, काशी तमिल संगमम 4.0 के अंतर्गत आयोजित ‘तमिल कर्कलम’ (तमिल सीखें) विशेष कक्षाएं सोमवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गईं। शिक्षा मंत्रालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के तत्वावधान में चले इस कार्यक्रम में जिले के 50 माध्यमिक विद्यालयों में 14 दिनों तक तमिल भाषा की कक्षाएं संचालित की गईं, जिनमें सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

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तमिलनाडु से आए 50 हिंदी जानने वाले शिक्षकों के दल ने वाराणसी के चयनित स्कूलों में छात्रों को तमिल भाषा की बुनियादी जानकारी प्रदान की। रोजाना दो घंटे की इन कक्षाओं में बोलचाल की तमिल, सामान्य शब्दावली, अभिवादन और सांस्कृतिक परिचय पर विशेष ध्यान दिया गया। भाषा को रोचक बनाने के लिए छात्रों को गतिविधि आधारित एक्टिविटी बुक भी वितरित की गईं, जिनके माध्यम से संवाद, अभ्यास और सांस्कृतिक उदाहरणों से प्रभावी शिक्षण हुआ।

कार्यक्रम का एक यादगार पल तब सामने आया जब तमिल शिक्षक दल राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज और बीएचयू कैंपस हाई स्कूल (लड़के व लड़कियां) पहुंचा। यहां छात्रों ने पारंपरिक स्वागत करते हुए तमिल में ‘वणक्कम’ (नमस्कार) कहकर शिक्षकों का अभिनंदन किया, जिससे स्कूल परिसर सांस्कृतिक सौहार्द से भर गया।

जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) भोलेंद्र प्रताप सिंह ने कक्षाओं का निरीक्षण किया और शिक्षकों-छात्रों से बातचीत की। उन्होंने कहा, “काशी तमिल संगमम सिर्फ भाषा शिक्षण नहीं, बल्कि तमिलनाडु व काशी के बीच ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता के ऐतिहासिक रिश्तों को जीवंत करने का बड़ा प्रयास है। यह राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में सराहनीय कदम है।”

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इन विशेष कक्षाओं का आयोजन जिन स्कूलों में हुआ, उनमें राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मलदहिया, प्रभु नारायण राजकीय इंटर कॉलेज रामनगर, राधा किशोरी राजकीय इंटर कॉलेज रोहनिया, भारती शिक्षा मंदिर इंटर कॉलेज और आर्य महिला इंटर कॉलेज सहित कुल 50 माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं।

15 दिसंबर को समाप्त हुई इन कक्षाओं के बाद छात्रों में तमिल भाषा व संस्कृति के प्रति गजब की रुचि देखने को मिली। शिक्षकों और छात्रों ने इस पहल को सांस्कृतिक आदान-प्रदान व राष्ट्रीय एकता का सफल उदाहरण बताया। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करने वाला यह कार्यक्रम काशी की गलियों में तमिल की मधुर गूंज छोड़ गया।

Shiv murti

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