भक्ति केवल शब्द नहीं, जीवन जीने की सजग यात्रा है: सुदीक्षा
वाराणसी (जनवार्ता) । संत निरंकारी मिशन के वार्षिक भक्ति पर्व समागम का पावन आयोजन हरियाणा के समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर अत्यंत भक्ति-भाव और दिव्य ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा ।

सतगुरु ने भक्ति के सच्चे स्वरूप पर गहन प्रकाश डालते हुए बताया कि सच्ची भक्ति कोई दिखावा या नामधारी नहीं, अपितु आत्म-मंथन, स्वयं की जांच, कमियों का सुधार और हर क्षण जागरूकता के साथ जीना है। उन्होंने कहा, “भक्त का स्वभाव मरहम का होता है, जो घाव भरता है, चोट नहीं पहुंचाता। निराकार परमात्मा को प्रत्येक में देखकर सरल व निष्कपट व्यवहार करना, ब्रह्मज्ञान के बाद सेवा, सुमिरन और सत्संग द्वारा इस अनुभूति को जीवंत रखना ही वास्तविक भक्ति है। भक्ति एक चुनाव है—नाम की नहीं, जीवन की।”
समागम में निरंकारी राजपिता ने भी श्रद्धालुओं को प्रेरित किया। उन्होंने समझाया कि भक्ति कोई पद, पहचान या मनगढ़ंत परिभाषा नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान प्राप्ति के बाद करता-भाव के समाप्त होने पर स्वाभाविक रूप से उपजने वाला जीवन-जीने का ढंग है। “संतों ने गुरु वचन को स्वाभाविक रूप से माना, जबकि आज हम बहाने बनाते हैं। भक्ति प्रेम का चुनाव है, जहां प्रयास होते हैं, दावा नहीं।”
सतगुरु माता जी ने माता सविंदर और राजमाता के जीवन को भक्ति, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा का जीवंत प्रतीक बताते हुए कहा कि इन महान मातृशक्तियों का जीवन निरंकारी मिशन के लिए सर्वोत्तम उदाहरण है, जो हर श्रद्धालु को सेवा और समर्पण की प्रेरणा देता है।
इस पावन अवसर पर परम संत संतोख सिंह जी सहित अन्य संत महापुरुषों के तप, त्याग और ब्रह्मज्ञान के प्रचार-प्रसार में दिए गए अमूल्य योगदान का भावपूर्ण स्मरण किया गया। श्रद्धालुओं ने उनके जीवन से प्रेरणा लेकर भक्ति, सेवा और समर्पण के मूल्यों को जीवन में उतारने का दृढ़ संकल्प लिया।
श्री सुखदेव सिंह ने मलदहिया सत्संग भवन में उपस्थित भक्तों को बताया कि निरंकारी मिशन का मूल सिद्धांत यही है कि भक्ति परमात्मा के तत्व को जानने के बाद ही सार्थक और पूर्ण स्वरूप प्राप्त करती है। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के अमूल्य प्रवचन हर श्रद्धालु को ब्रह्मज्ञान के माध्यम से भक्ति के वास्तविक अर्थ को समझने और दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

