वरिष्ठ पत्रकार गोपेश पाण्डेय के निधन से काशी की पत्रकारिता को लगा गहरा आघात

वरिष्ठ पत्रकार गोपेश पाण्डेय के निधन से काशी की पत्रकारिता को लगा गहरा आघात

वाराणसी (जनवार्ता) । बनारस के वरिष्ठ एवं सम्मानित पत्रकार पंडित गोपेश पांडेय का निधन हो गया है। उनके जाने से काशी की पत्रकारिता परंपरा को अपूरणीय क्षति पहुंची है। वे उन विरले पत्रकारों में से थे, जिनके लिए पत्रकारिता मात्र पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति नैतिक जिम्मेदारी और सिद्धांतों का पालन था।

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मंगलवार को काशी पत्रकार संघ के तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पत्रकारिता, राजनीति, शिक्षा एवं समाजसेवा से जुड़े गणमान्य लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सभा में वक्ताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि स्व. गोपेश पांडेय ने हमेशा ईमानदारी, निर्भीकता और मूल्यपरक पत्रकारिता को जीवन का मूलमंत्र बनाए रखा। सत्ता के भय या पद के लोभ से कभी समझौता नहीं किया। प्रबंधन के सामने भी सिद्धांतों पर अडिग रहे।

काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पत्रकारों की एकजुटता, अधिकारों और गरिमा के लिए निरंतर संघर्ष किया। युवा पत्रकारों के लिए वे मार्गदर्शक बने रहे और सिखाया कि खबर से पहले इंसान और सच सर्वोपरि है।

सभा की अध्यक्षता काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्र ने की। संचालन महामंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन गोपेश पांडेय के भाई राघवेश पांडेय ने किया।

इस अवसर पर प्रो. राममोहन पाठक, एमएलसी धर्मेंद्र राय, प्रो. सतीश राय, प्रो. अनिल उपाध्याय, रजनीश त्रिपाठी, पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल, गोपेश जी की बेटी आकांक्षा पांडेय, बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव व शिव कुमार, समाजवादी चिंतक विजय नारायण सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

बीएचयू विधि संकाय के प्रो. क्षेमेंद्र मणि त्रिपाठी ने अपने पिता स्व. प्रो. हरिहर नाथ त्रिपाठी की जयंती समारोह में पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों को प्रतिवर्ष गोपेश पांडेय स्मृति पुरस्कार देने की घोषणा की।

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सीबीआई के पूर्व डिप्टी एसपी राघवेंद्र सिंह, बीएचयू के पूर्व प्रो. बीआर गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार विनय सिंह एवं राजेश राय ने शोक संदेश भेजकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

गोपेश पांडेय भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी निर्भीक कलम, मूल्यनिष्ठ सोच और साहसी विरासत बनारस की पत्रकारिता को हमेशा दिशा देती रहेगी। वे स्मृतियों में नहीं, सिद्धांतों में जीवित रहेंगे।

Shiv murti

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