वाराणसी के तेलियानाला घाट पर नाविकों का गुंडाराज: पर्यटकों के साथ हो रहा दुर्व्यवहार
‘नाविक माफिया’ की मनमानी से बिगड़ रही काशी की छवि
वाराणसी (जनवार्ता): वाराणसी का तेलियानाला घाट, जो गंगा तट पर पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है, अब नाविकों के आपसी झगड़ों और यात्रियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का केंद्र बन चुका है। आदमपुर थाना क्षेत्र में स्थित इस घाट पर रोजाना नाविक यात्रियों को जबरन अपनी-अपनी नाव में चढ़ाने, मनमाना किराया वसूलने और एक-दूसरे से खींचतान करने की घटनाएं आम हो गई हैं।


कुछ दिनों पूर्व घाट पर नाविकों के दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें पथराव और मारपीट के दौरान एक महिला घायल हो गई थी और पुलिस ने तीन नाविकों को गिरफ्तार किया था। इसी तरह एक पर्यटक समूह ने तेलियानाला घाट से बुक की गई नौका में अस्सी घाट ले जाने का विरोध किया तो नाविकों ने उन्हें गंगा में डुबाने की धमकी दी, जिसके बाद दशाश्वमेध थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई। लगातार ऐसे कई विवाद सामने आ रहे हैं, जहां नाविक आपस में यात्रियों को लेकर झगड़ पड़ते हैं और पूरे घाट पर अराजकता फैल जाती है।
इस समस्या को और गंभीर बनाता है ऑटो तथा ई-रिक्शा (टोटो) चालकों की दलाली। ये चालक पर्यटकों को घाट तक लाकर नाविकों से कमीशन वसूलते हैं और इस सिलसिले में नाविकों के साथ मिलकर काम करते हैं, जिससे यात्रियों की खींचतान और बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस इस पूरे मामले में मूकदर्शक बनी रहती है या कुछ मामलों में नाविकों के साथ मिली हुई है, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
वाराणसी ‘अतिथि देवो भव:’ की नगरी के रूप में जानी जाती है, जहां हर साल हजारों देशी-विदेशी पर्यटक गंगा आरती देखने, नौका विहार करने और घाटों के दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन ऐसी घटनाएं शहर की आध्यात्मिक छवि को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं और पर्यटक निराश होकर लौट रहे हैं, जिससे काशी की प्रतिष्ठा के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गहरा नुकसान पहुंच रहा है।
इस ‘नाविक माफिया’ जैसी स्थिति को जड़ से खत्म करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। घाट पर फिक्स्ड किराया सूची लगाई जानी चाहिए और उसका सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए। पुलिस तथा जल पुलिस की सक्रिय निगरानी बढ़ानी होगी। नाविकों को उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने पर उनके लाइसेंस रद्द करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही दलालों की भूमिका निभा रहे ऑटो और टोटो चालकों पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जाना जरूरी है।
काशी की आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सुंदरता को बचाए रखने के लिए पर्यटकों की सुरक्षा और सम्मान सबसे महत्वपूर्ण है। प्रशासन को अब इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना होगा, ताकि वाराणसी आने वाला हर अतिथि सुखद और यादगार अनुभव लेकर लौट सके।

