वाराणसी : मनरेगा मजदूर यूनियन ने ‘जी राम जी’ नाम पर उठाया विरोध
वाराणसी (जनवार्ता) : केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘ जी राम जी’ (संक्षेप में ‘जी राम जी’) करने के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के विकास खंड आराजीलाईन अंतर्गत ग्राम पंचायत महगांव में बुधवार को ‘मनरेगा मजदूर यूनियन’ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।


यूनियन की सह-संयोजिका रेनू पटेल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केंद्र सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया गया। मजदूरों ने मांग की कि योजना को उसके मूल नाम ‘मनरेगा’ या ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ से ही जारी रखा जाए, क्योंकि नाम बदलने से योजना की पहचान और महात्मा गांधी की विरासत पर असर पड़ता है।
बैठक में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव विरेंद्र यादव ने हिस्सा लिया। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों की कथित कमियों पर प्रकाश डाला और मजदूरों को ‘फरेब’ से बचाने की अपील की। उनके साथ यूनियन के अनिल मौर्य, मुश्तफा, सरोज पटेल, कविता, पूजा प्रभा पटेल सहित ग्राम सभा महगांव, कचहरियाँ, कनकपुर, जोगापुर के सैकड़ों ग्रामीण मजदूर और नागरिक मौजूद रहे।
बैठक का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने किया। वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा गरीब ग्रामीणों के लिए रोजगार की गारंटी है और इसका नाम बदलना महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजना की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने सरकार से मांग की कि नाम परिवर्तन का प्रस्ताव वापस लिया जाए और योजना को पुराने स्वरूप में बहाल किया जाए।
बता दें कि विपक्षी दल पूरे देश में इस नाम बदलाव का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस समेत अन्य दल इसे महात्मा गांधी की विरासत पर हमला बता रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि नया नाम ‘विकसित भारत’ के विजन से जुड़ा है और योजना में कुछ सुधार जैसे रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने पर विचार है।
वाराणसी में मनरेगा मजदूर यूनियन की यह बैठक स्थानीय स्तर पर विरोध को मजबूती देती नजर आ रही है, जहां गांव-गांव में मजदूरों का समर्थन जुटाया जा रहा है। मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

