चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर आरोप: ऑपरेशन के बाद मरीज की मौत, परिजन और अस्पताल आमने-सामने
चौबेपुर (जनवार्ता संवाददाता) ।स्थानीय थाना क्षेत्र के डुबकियां बाजार स्थित निजी एस.एन. हॉस्पिटल में पथरी के ऑपरेशन के बाद एक बुजुर्ग मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि डॉक्टरों ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


मृतक हवलदार यादव (50 वर्ष), निवासी ग्राम बहुरा (गोदाम), थाना खानपुर, जिला गाजीपुर के पुत्र अरविंद यादव ने बताया कि उनके पिता का पथरी का ऑपरेशन वाराणसी-गाजीपुर रोड स्थित एस.एन. हॉस्पिटल (ट्रॉमा सेंटर, जेबी टॉवर) में डॉ. सौरभ सिंह और डॉ. नीलेश यादव द्वारा किया गया था। ऑपरेशन सफल होने के बाद पांच दिन बाद मरीज को घर भेज दिया गया।
परिजनों के अनुसार, दो सप्ताह बाद शनिवार को जब उन्हें दोबारा डॉ. नीलेश यादव को दिखाने ले गए, तो डॉक्टर ने उनकी जांच करवाकर पोटैशियम का स्तर कम बताते हुए ड्रिप चढ़ाई। करीब तीन घंटे बाद दवा देकर मरीज को सुला दिया और तुरंत घर ले जाने की सलाह दी गई। घर लौटते समय गाजीपुर के गोरखपुरा इलाके के पास मरीज की हालत अचानक बिगड़ गई। स्थानीय डॉक्टर ने ब्लड प्रेशर न आने की बात कही और तत्काल उसी अस्पताल वापस भेज दिया।
अरविंद यादव ने कड़ा आरोप लगाते हुए कहा, “अस्पताल पहुंचते ही डॉ. नीलेश यादव ने मरीज को लेने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि हमने तो मरीज को सही-सलामत डिस्चार्ज किया था।” परिवार का दावा है कि इलाज में लापरवाही के कारण ही हवलदार यादव की मौत हुई। उन्होंने पोस्टमॉर्टम के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, मामले में नामजद डॉ. सौरभ सिंह ने जनवार्ता से बातचीत में परिजनों के सभी आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया। उन्होंने कहा कि मरीज का पूरा इलाज चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया था और मृत्यु का कारण उनकी किसी भी लापरवाही से नहीं जुड़ा है।
थाना प्रभारी इंद्रेश कुमार ने बताया कि परिजनों की लिखित शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है तथा अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है।
फिलहाल, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के नतीजे पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

