जब तक हमारी जड़ें हवा में रहेंगी हम उन्नति नहीं कर सकते : प्रो. एके त्यागी
जीवनदीप में कर्तव्य बोध पखवारा 2026 के अंतर्गत 71 शिक्षकों को युवा शक्ति सम्मान से किया गया सम्मानित
वाराणसी (जनवार्ता)। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की काशी महानगर इकाई एवं जीवनदीप महाविद्यालय बड़ा लालपुर के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को कर्तव्य बोध पखवारा 2026 के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक शिक्षण के क्षेत्र में नव प्रतिमान स्थापित करने वाले सभी संवर्गों के कुल 71 शिक्षकों को युवा शक्ति सम्मान से सम्मानित किया गया।

जीवनदीप महाविद्यालय के सभागार में आयोजित इस शैक्षिक संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों द्वारा सरस्वती प्रतिमा पर पुष्प अर्पण तथा दीप प्रज्वलन से प्रारंभ हुआ। महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं सुश्री शांभवी द्वारा सुमधुर संगीतमय स्वागत गीत से समस्त विद्वतजनों का स्वागत किया गया।
कार्यक्रम सचिव अमिताभ मिश्र द्वारा वेद मंत्रों के द्वारा वैदिक मंगलाचरण किया गया तत्पश्चात जीवनदीप शिक्षण समूह के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार सिंह व निदेशिका डॉ. अंशू सिंह द्वारा मंचासीन अतिथियों सहित समस्त विद्वत जनों का सम्मान किया गया। डॉ. सिंह ने कहा कि शिक्षकों के सम्मान से सम्मान भी अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता है।
संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए करते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दीनानाथ सिंह ने संगठन के आरंभिक दौर की चर्चा करते हुए स्वामी विवेकानंद एवं सुभाष चंद्र बोस जी की यात्रा का वर्णन करते हुए कहा कि आज की युवा शक्ति को राष्ट्रहित में अपने इन्हीं जैसे पुरोधाओं के आदर्शों को आत्मसात करने की आवश्यकता है।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि हमें खुद आत्मनिरीक्षण होना होगा, केवल छात्रों को ही नहीं जिम्मेदार बनाएंगे। कक्षा में नयापन आना चाहिए। उन्होंने ए आई एनरिच्ड कक्षाओं एवं आधुनिक डिजिटल टूल का प्रयोग करने पर बल दिया। कहा की ज्ञान केवल सूचना मात्र नहीं है वास्तविक ज्ञान वही है जिससे मानवता की शास्वतता सुनिश्चित हो सके। आज शिक्षा को आंचलिक रूप से समृद्ध करने की आवश्यकता है।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता व गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आरएस दूबे ने कहा कि हमारे शास्त्रों में गुरु को साक्षात ब्रह्म कहा गया है जैसे ब्रह्म संपूर्ण सृष्टि का निर्माण करता है ठीक उसी तरह से गुरु भी छात्र को संस्कारों से जोड़कर उसके अंदर नैतिक मूल्यों की स्थापना करते हुए आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। संगोष्ठी में विद्या भारती के प्रो. रघुराज सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रुप में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज शिक्षा में नवाचार की विशेष जरुरत है। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा की शिक्षक ज्ञान का दीप छात्र के अंदर जगाता है। प्रेरित करता है। छात्र में ज्ञान से लेकर बोध तक की यात्रा कराना शिक्षक का दायित्व है। उन्होंने भारत के अमृत काल की चर्चा करते हुए कहा कि विकसित भारत होगा तो उसका रास्ता अध्यापक के घर से होकर जाएगा। कार्यक्रम के अन्त में वंदेमातरम गीत के पश्चात शत-प्रतिशत मतदान के लिए शपथ दिलाई गई। संगोष्ठी का संचालन डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित और प्रो. अंजू सिंह एवं धन्यवाद कार्यक्रम संयोजक डॉ. रश्मि सिंह द्वारा किया गया।
संगोष्ठी में जीवनदीप महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. इन्द्रेश चंद्र सिंह, प्रो. केके सिंह अनुशास्ता काशी विद्यापीठ,
प्रो. बीरेन्द्र कुमार निर्मल, प्रो. नलिनी श्याम कामिल, प्रो. वंदना पांडेय, प्रो. राघवेन्द्र कुमार पांडेय, प्रो. प्रतिभा सिंह, प्रो. माया सिंह, प्रो. संजय चतुर्वेदी, प्रो. ओमप्रकाश चौधरी, प्रो. अरुण कुमार राय, प्रो. हिमांशु सिंह, लहजे कुशवाहा, जीवनदीप शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जिनेन्द्र कुमार सिंह, डॉ. राजेश कुमार सिंह, डॉ. नलिन कुमार मिश्र, डॉ. जगत सिंह, डॉ. राम प्रकाश सिंह यादव, ज्योति प्रकाश, रामाशीष शर्मा कमलेश सिंह, अव निंद्र सिंह, प्रो. बब्बन राम, डॉ. पायल श्रीवास्तव, अल्का सिंह आदि मौजूद रहे। य़ह पूरा कार्यक्रम जीवन दीप शिक्षण समूह की निदेशिका श्रीमती अंशु सिंह के सौजन्य से आयोजित हुआ।

