शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना संगम स्नान किए छोड़ा माघ मेला, काशी के लिए रवाना

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना संगम स्नान किए छोड़ा माघ मेला, काशी के लिए रवाना

प्रयागराज (जनवार्ता): ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज के चल रहे माघ मेले को बीच में छोड़ दिया है। बुधवार सुबह उन्होंने बिना संगम स्नान किए मेला क्षेत्र से विदा ली और काशी (वाराणसी) के लिए प्रस्थान कर गए। यह घटना धार्मिक इतिहास में पहली बार दर्ज हुई है, जब कोई शंकराचार्य माघ मेले में शामिल होने के बाद मुख्य स्नान किए बिना लौटे हैं।

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विवाद की जड़ 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन पड़ी, जब शंकराचार्य पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। मेला प्रशासन और पुलिस ने उन्हें रोका और दावा किया कि भीड़ के कारण सुरक्षा जोखिम था, जिससे स्टैम्पेड जैसी स्थिति बन सकती थी। इसलिए पालकी या रथ को प्रतिबंधित रास्ते से जाने की अनुमति नहीं दी गई। शंकराचार्य के समर्थकों ने आरोप लगाया कि उनके शिष्यों के साथ मारपीट हुई, धार्मिक छत्र तोड़ा गया और अपमान किया गया। इस घटना के बाद शंकराचार्य ने अपने शिविर के बाहर धरना शुरू किया, जो लगभग 11 दिनों तक जारी रहा। उन्होंने मेला प्रशासन से माफी, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और लिखित आश्वासन की मांग की।

प्रशासन ने दो नोटिस जारी किए। पहले नोटिस में पालकी और प्रक्रिया उल्लंघन का आरोप था, जबकि दूसरे में उनके ‘शंकराचार्य’ पद के उपयोग पर सवाल उठाया गया। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश का हवाला दिया गया, जिसमें ज्योतिषपीठ के उत्तराधिकार का मामला लंबित होने तक किसी को शंकराचार्य नियुक्त करने पर रोक है। शंकराचार्य ने इन नोटिसों को अपमानजनक करार दिया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सनातन धर्म, संतों और गोरक्षा के खिलाफ अन्याय है तथा हुक्मरानों के इशारे पर हुआ। उन्होंने अपनी सुरक्षा को खतरा बताया, हत्या की साजिश का डर जताया और पिछले महाकुंभ में हुई मौतों का जिक्र कर जिम्मेदारी पर सवाल उठाए।

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28 जनवरी की सुबह उन्होंने धरना समाप्त कर मेला छोड़ने का फैसला किया। प्रस्थान से पहले भावुक संदेश में उन्होंने कहा कि उनका मन व्यथित है और वे न्याय की प्रतीक्षा में लौट रहे हैं। संगम स्नान को केवल रिवाज नहीं, बल्कि आत्मा की शांति का माध्यम बताया, लेकिन पीड़ा में यह संभव नहीं रहा। उन्होंने कहा कि यह प्रस्थान नहीं, बल्कि कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ना है जो समाज और विश्व में गूंजते रहेंगे। वे काशी पहुंचकर कुछ दिन वहां रहेंगे।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज रहीं। अखिलेश यादव ने सरकार पर हमला बोला कि संतों का मन दुखी करके कोई सुख नहीं मिलता। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने समर्थन किया। योगी सरकार के पक्ष में कुछ अधिकारियों ने इस्तीफे दिए और आरोपों को बेबुनियाद बताया। उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्नान करने की अपील की और जांच का वादा किया।

माघ मेला मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक चलता है, जिसमें कल्पवास मकर संक्रांति से माघ पूर्णिमा (इस साल 1 फरवरी) तक होता है। शंकराचार्य पहले माघ पूर्णिमा तक रहने वाले थे, लेकिन विवाद के कारण बीच में लौट गए। यह घटना धार्मिक परंपराओं, प्रशासनिक प्रोटोकॉल और शंकराचार्य पद के विवाद को उजागर करती है। मेला प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा सर्वोपरि थी और कोई अन्याय नहीं हुआ।

Shiv murti

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