गोरखपुर एम्स के छात्र मेस में कीड़े निकलने से आक्रोशित
प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
गोरखपुर (जनवार्ता) । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गोरखपुर के छात्रावास मेस में खाने की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार को मेडिकल छात्रों ने दाल और सब्जी में कीड़े मिलने की शिकायत की और फोटो-वीडियो साक्ष्य प्रशासन को सौंपे। छात्रों का कहना है कि मेस संचालक और प्रशासन की मिलीभगत से लगातार घटिया खाना परोसा जा रहा है जबकि जांच का नाम सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गया है।

छात्रों ने बताया कि रात का बासी भोजन सुबह दोबारा गरम करके परोस दिया जाता है। खुले में फेंकी गई सड़ी-गली सब्जियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिक तेल और तेज मसालों के कारण स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है। चिकन बिरयानी के नाम पर अक्सर सिर्फ चावल परोसने की शिकायतें आम हैं। ऐसी स्थिति में कई छात्र अब बाहर से टिफिन मंगाने को मजबूर हो गए हैं।
मेस का ठेका गुजरात की श्रीदेवी कैटर्स अलंकेश्वर कंपनी को मिला हुआ है। कंपनी के मैनेजर राधेश्याम ने छात्रों से कहा कि जो पेमेंट मिल रहा है उसमें इससे बेहतर क्वालिटी का खाना देना संभव नहीं है। छात्रों का आरोप है कि डॉक्टर खुद मेस में खाना खाना बंद कर चुके हैं और केवल रजिस्टर में साइन करके हाजिरी लगा रहे हैं। पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉक्टर जीके पाल के समय नियमित जांच और छात्रों के साथ भोजन करने की प्रथा थी जिससे शिकायतें काफी कम हो गई थीं लेकिन अब हालात फिर बिगड़ गए हैं।
छात्रों ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं और वरिष्ठ अधिकारी मेस में जाना लगभग बंद कर चुके हैं जिससे मेस संचालक पूरी तरह बेपरवाह हो गया है। मेस में गार्ड और पुलिसकर्मी भी आकर भोजन करते हैं और सीटों पर कब्जा कर लेते हैं लेकिन प्रशासन की ओर से कोई रोक-टोक नहीं की जा रही है।
छात्रों ने अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने शाम को स्नैक्स की व्यवस्था करने, गुणवत्ता और मात्रा बढ़ाने के लिए दाम बढ़ाने की संभावना पर विचार करने, भोजन में विविधता लाने जिसमें दूध ब्रेड जैम आदि शामिल हों और नाश्ता वैकल्पिक रखने की मांग की है।
एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉक्टर विभा दत्ता ने बताया कि मेस संचालक पर जुर्माना लगाने का निर्देश दिया गया है। वरिष्ठ डॉक्टर रोजाना निरीक्षण कर रहे हैं और भोजन की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा रही है। व्यवस्था में सुधार के लिए विचार-विमर्श जारी है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।

