युवा महिला पहलवान ने विषाक्त खाकर दी जान

युवा महिला पहलवान ने विषाक्त खाकर दी जान

वाराणसी  (जनवार्ता): वाराणसी के मिर्जामुराद क्षेत्र के ठटरा गांव (कछवां रोड) में 23 वर्षीय प्रतिभाशाली महिला पहलवान निधि सिंह ने परिवार में हुई किसी बात से क्षुब्ध होकर सल्फास (जहर) खा लिया। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान शुक्रवार की भोर में उनकी मौत हो गई। यह घटना स्थानीय स्तर पर शोक की लहर पैदा कर गई है, क्योंकि निधि पिछले कई वर्षों से कुश्ती में सक्रिय थीं और उन्होंने अंडर-19 वर्ग में तीन बार सिल्वर मेडल जीते थे।

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निधि सिंह स्वर्गीय श्रीप्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना सिंह की पुत्री थीं। उनके पिता की कई वर्ष पहले ट्रैक्टर दुर्घटना में मौत हो चुकी है, जबकि माता ममता सिंह की भी बीमारी से असामयिक मृत्यु हो गई थी। परिवार में एक भाई शिवम और तीन बहनें हैं, जिसमें निधि दूसरे नंबर पर थीं। परिवार की मुख्य आय का स्रोत खेती-किसानी है।

परिवार के अनुसार, निधि वर्ष 2018 से कुश्ती का अभ्यास कर रही थीं। शुरुआत कछवां अखाड़े से की, फिर जिले के अन्य अखाड़ों से जुड़कर प्रदेश स्तर की कई दंगल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। उनकी उपलब्धियों में अंडर-19 कैटेगरी में तीन सिल्वर मेडल शामिल हैं। बुधवार दोपहर परिवार में हुई किसी बात पर गुस्से में आकर उन्होंने घर में रखा सल्फास का सेवन कर लिया। इसके बाद उन्होंने अपनी सहेली को फोन किया, जिसने सूचना निधि की छोटी बहन को दी। भाई शिवम ने उन्हें तुरंत कछवां रोड स्थित प्रकाश हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां से गंभीर हालत में बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।

दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। लंका पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। मिर्जामुराद थानाप्रभारी प्रमोद पांडेय ने बताया कि अभी तक कोई लिखित शिकायत (तहरीर) नहीं मिली है। पुलिस ने घटनास्थल पर जांच-पड़ताल की है।

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परिवार में पहले भी आत्महत्या की घटना हुई है। निधि के चाचा शिवप्रकाश सिंह उर्फ छुन्ना ने वर्ष 2024 में होली के दिन लाइसेंसी पिस्तौल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। दादा मातादयाल सिंह और दादी श्यामा देवी समेत पूरा परिवार इस सदमे से बुरी तरह आहत है। दादी ने बताया कि निधि काफी दिनों से परेशान दिख रही थीं, हालांकि सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका।

यह घटना युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक तनाव के प्रति जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। कुश्ती जैसे कठिन खेल में सक्रिय युवा प्रतिभाओं को समय पर सहायता और मार्गदर्शन की जरूरत है। स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों को ऐसे मामलों में सक्रिय हस्तक्षेप करने की अपील की जा रही है।

Shiv murti

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