एनडीआरएफ ने दशाश्वमेध घाट पर आयोजित किया जन जागरूकता कार्यक्रम
“जन जागरूकता ही सर्वोत्तम बचाव”
वाराणसी (जनवार्ता) : राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की 11वीं बटालियन, वाराणसी ने काशी के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर एक महत्वपूर्ण सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मनोज कुमार शर्मा के दिशा-निर्देशन में संपन्न हुआ।


कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनता को आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराना, जीवन रक्षक कौशलों में प्रशिक्षित करना और एक जागरूक, सशक्त समाज का निर्माण करना था, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में जन-हानि को न्यूनतम स्तर तक सीमित किया जा सके।
डीआईजी मनोज कुमार शर्मा ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “किसी भी आपात स्थिति में सबसे पहले प्रभावित स्थानीय समुदाय ही होता है और प्रारंभिक प्रतिक्रिया भी यही देता है। यदि हम प्रत्येक नागरिक को बुनियादी जीवन रक्षक कौशलों से लैस कर सकें, तो आपदा के दौरान होने वाली भीषण क्षति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। एनडीआरएफ इसी दिशा में निरंतर प्रयासरत है।”
एनडीआरएफ के बचाव कर्मी वर्ष भर न केवल प्राकृतिक एवं मानव-निर्मित आपदाओं से जूझकर अमूल्य मानव जीवन बचाते हैं, बल्कि स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम, क्षमता निर्माण प्रशिक्षण, समुदाय जागरूकता अभियान, मॉक ड्रिल आदि के माध्यम से समाज और सभी हितधारकों की आपदा प्रबंधन क्षमता बढ़ाने का कार्य भी करते रहते हैं।
दशाश्वमेध घाट जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व के स्थान पर आयोजित यह कार्यक्रम स्थानीय निवासियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आपदा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम माना जा रहा है। एनडीआरएफ का यह प्रयास “आपदा सेवा सदैव सर्वत्र” की भावना को साकार करता है।

