शिक्षकों ने किया केंद्रीय राज्य मंत्री के पुतला दहन का प्रयास, पुलिस ने रोका
वाराणसी (जनवार्ता)। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में शिक्षकों ने बुधवार को शास्त्री घाट (वरुणापुल) पर एकत्र होकर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी के संसद में दिए गए हालिया बयान के खिलाफ तीखा विरोध जताया। शिक्षकों ने मंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें मुख्य द्वार पर रोक दिया और कुछ शिक्षकों द्वारा अंदर पहुंचने पर छीना-झपटी कर पुतला जब्त कर लिया। इससे शिक्षक संगठन के सदस्य काफी आहत और स्तब्ध नजर आए।


शिक्षकों का मुख्य आरोप है कि मंत्री ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) सभी शिक्षकों के लिए न्यूनतम अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी, जिसमें आरटीई एक्ट लागू होने से पहले (29 जुलाई 2011 से पूर्व) नियुक्त शिक्षकों को भी शामिल किया जा रहा है। शिक्षक लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि पुराने नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से पूरी तरह मुक्त रखा जाए, क्योंकि यह उनकी सेवा शर्तों, पदोन्नति और नौकरी की सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों और केंद्र सरकार की ओर से कोई राहत न मिलने से शिक्षकों में आक्रोश बढ़ गया है।
प्रदर्शन की अगुवाई जिला संयोजक कैलाश नाथ यादव ने की। उन्होंने कहा, “यदि केंद्र सरकार जल्द ही उचित कदम नहीं उठाती और पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त नहीं करती, तो शिक्षक बड़े स्तर पर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। दिल्ली कूच और राष्ट्रव्यापी रैली जैसी कार्रवाई की जा सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार पर होगी।”
कार्यक्रम में पूर्व जिला अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, सनत कुमार सिंह, संजय सिंह, वीरेंद्र सिंह, राजेश सिंह, जितेंद्र पांडेय, अजय तिवारी, रमाशंकर यादव, मनोज सिंह, राजेंद्र राय, राजेश श्रीवास्तव, विवेकानंद सिंह, मोहन सहित सैकड़ों शिक्षक शामिल रहे।

