बनारस लोकोमोटिव वर्क्स ने मोजाम्बिक को रवाना किया 10वां स्वदेशी 3300 एचपी लोकोमोटिव
‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी जीत
वाराणसी (जनवार्ता) । बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बरेका) ने ‘मेक इन इंडिया’ की एक और बड़ी जीत हासिल की है। कंपनी ने मोज़ाम्बिक के लिए स्वदेशी 3300 एचपी डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की 10वीं और अंतिम इकाई 21 फरवरी 2026 को सफलतापूर्वक रवाना की।


यह पूरा ऑर्डर RITES के माध्यम से पूरा हुआ, जिसमें कुल 10 ऐसे शक्तिशाली लोकोमोटिव शामिल थे। डिलीवरी का क्रम इस प्रकार रहा – पहली दो इकाइयाँ जून 2025 में, तीसरी सितंबर 2025 में, चौथी अक्टूबर 2025 में, पाँचवीं 12 दिसंबर 2025 को, छठी 15 दिसंबर 2025 को, सातवीं 8 जनवरी 2026 को, आठवीं 23 जनवरी 2026 को, नौवीं 17 फरवरी 2026 को और दसवीं 21 फरवरी 2026 को भेजी गईं।
ये केप गेज (1067 mm) लोकोमोटिव 100 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति से दौड़ने में सक्षम हैं। इनमें उन्नत एसी-एसी ट्रैक्शन तकनीक, आधुनिक और एर्गोनॉमिक कैब डिज़ाइन, चालक के लिए रेफ्रिजरेटर, हॉट प्लेट, मोबाइल होल्डर जैसी सुविधाएँ और उच्च सुरक्षा वाली परिचालन प्रणालियाँ लगाई गई हैं, जो चालक की सुविधा और इंजन की विश्वसनीयता दोनों को सुनिश्चित करती हैं।
बरेका अब वैश्विक स्तर पर लोकोमोटिव निर्यात का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। 2014 से अब तक इसने तंजानिया, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका, मलेशिया, सूडान, अंगोला, म्यांमार, सेनेगल, माली और मोज़ाम्बिक समेत कुल 11 देशों को 182 लोकोमोटिव निर्यात किए हैं। इन प्रयासों से इन देशों की रेल प्रणालियों के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।
रेल मंत्रालय और भारतीय रेलवे के अनुसार यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया – मेक फॉर द वर्ल्ड’ के विजन का जीवंत उदाहरण है। भारत न केवल स्वदेशी तकनीक से आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि अफ्रीका और एशिया के कई देशों की रेल अवसंरचना को मजबूत करने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
बरेका के जन संपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि यह निर्यात भारतीय इंजीनियरिंग की उत्कृष्ट गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और समय पर डिलीवरी की प्रतिबद्धता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती से स्थापित करता है। यह कदम भारत को वैश्विक रेल उपकरण निर्यातक के रूप में और अधिक सशक्त स्थिति प्रदान करेगा।

