बेसिक शिक्षकों में टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ तेज़ विरोध

बेसिक शिक्षकों में टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ तेज़ विरोध

काली पट्टी बांधकर करेंगे धरना-प्रदर्शन

वाराणसी (जनवार्ता)  : उत्तर प्रदेश के लाखों बेसिक शिक्षकों में टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ गहरा रोष फैल गया है। सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के फैसले के बाद, आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त और 20-30 वर्षों से सेवा दे रहे 50-55 वर्ष की उम्र के शिक्षकों पर भी टीईटी पास करना अनिवार्य हो गया है। शिक्षक संगठन इसे भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण करार दे रहे हैं, क्योंकि इससे अनुभवी शिक्षकों को परीक्षा की मजबूरी थोपी जा रही है।

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उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ वाराणसी के वरिष्ठ नेता सनत कुमार सिंह ने बताया कि यह फैसला लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के साथ घोर अन्याय है। उन्होंने कहा कि आरटीई लागू होने से पूर्व राज्यों द्वारा निर्धारित अर्हता के आधार पर नियुक्त शिक्षक वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन अब आरटीई के बाद की अर्हता को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है। सरकार को टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करनी होगी, अन्यथा संघर्ष और तेज होगा।

टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की अगुवाई में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने संयुक्त मोर्चा बनाया है। विरोध के तहत 22 फरवरी को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #JusticeForTeachers हैशटैग अभियान चला, जो कई घंटों तक ट्रेंडिंग में नंबर 1 पर रहा। 23, 24 और 25 फरवरी को सभी शिक्षक काली पट्टी बांधकर स्कूलों में शिक्षण कार्य करेंगे। यदि मांग नहीं मानी गई तो 26 फरवरी को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय पर विशाल धरना दिया जाएगा और जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

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सनत कुमार सिंह ने भारत सरकार से संसद में कानून बनाकर इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि अनुभव और समर्पण को नजरअंदाज कर परीक्षा थोपना उनके सम्मान के खिलाफ है। प्रदेशभर में यह आंदोलन तेजी से फैल रहा है, जिसमें वाराणसी, बस्ती, महराजगंज, इटावा आदि जिलों में बैठकें और घोषणाएं हो चुकी हैं। शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो मार्च में दिल्ली तक बड़ा आंदोलन होगा।

शिक्षकों की यह एकजुटता आरटीई एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बीच संतुलन की मांग को रेखांकित कर रही है। राज्य सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर चुकी है, जिस पर सुनवाई लंबित है। शिक्षक संगठन केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल राहत की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि अनुभवी शिक्षकों की नौकरी और सम्मान सुरक्षित रहे।

Shiv murti

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