कानपुर में ऑर्डनेंस फैक्ट्री के पास भीषण आग: सिलेंडर फटे, 20 दुकानें खाक, कारोबारियों का लाखों का नुकसान
कानपुर, (जनवार्ता)। शहर के फूलबाग स्थित फल मंडी में सोमवार शाम भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। ऑर्डनेंस फैक्ट्री (ओईएफ) के बगल में स्थित मंडी की 20 से अधिक दुकानें आग की चपेट में आकर जलकर राख हो गईं। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि 30 से 40 फीट तक उठती दिखाई दीं। घटना में करीब 25 ठेले, कुछ बाइकें और दुकानों में रखा लाखों रुपये का सामान भी जल गया। फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम करीब 6 बजे शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी, जिसने कुछ ही देर में पूरी मंडी को अपनी चपेट में ले लिया। इस दौरान घरेलू गैस के चार सिलेंडरों में जोरदार धमाके हुए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और तत्काल मंडी को खाली कराया गया।
आग में दुकानों को जलता देख एक महिला दुकानदार बेहोश हो गई। बताया गया कि एक महिला दुकानदार का करीब 5 लाख रुपये नकद और जेवर भी आग में जलकर राख हो गए। अन्य कई कारोबारियों की दिनभर की बिक्री के नोट और जरूरी दस्तावेज भी नहीं बच सके।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी दीपक शर्मा ने बताया कि फल मंडी ऑर्डनेंस फैक्ट्री के बेहद संवेदनशील इलाके के पास स्थित है। सिलेंडर फटने की सूचना मिलते ही तुरंत पांच दमकल गाड़ियां भेजी गईं। टीम ने चारों ओर से घेराबंदी कर आग पर काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।
घटना की सूचना मिलते ही आर्यनगर से सपा विधायक भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि पहले यह मंडी फूलबाग चौराहे पर लगती थी, लेकिन स्मार्ट सिटी योजना के तहत दुकानदारों को यहां टीन शेड के नीचे शिफ्ट किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके में सन्नाटा रहने और ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइनों के कारण यह स्थान पहले से ही जोखिम भरा था।
विधायक ने कहा कि आग से प्रभावित दुकानदारों को मुआवजा दिलाने के लिए जिलाधिकारी से मुलाकात की जाएगी। साथ ही जिन विभागों की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की जाएगी।
गौरतलब है कि यह फल और सब्जी मंडी पहले यहां से करीब 300 मीटर दूर फूलबाग चौराहे पर लगती थी। नगर निगम ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत दुकानदारों को बाउंड्री किनारे टीन शेड वाली दुकानें आवंटित की थीं। मंडी में फल-सब्जी के अलावा फास्ट फूड की दुकानें भी संचालित होती थीं। कुल 28 दुकानों में से 20 के जलने की पुष्टि हुई है।

