शंकराचार्य ने रामपाल को दी शास्त्रार्थ की चुनौती
‘रामपाल का रसातल गमन’ ग्रंथ का विमोचन, शिवांश नारायण द्विवेदी को बनाया प्रतिनिधि
वाराणसी (जनवार्ता)। ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामपाल को खुले मंच पर शास्त्रार्थ की चुनौती दी है। सोमवार को श्री विद्यामठ में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने रामपाल की पुस्तकों में सनातन धर्म, वेद-पुराणों और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर प्रस्तुत विचारों पर आपत्ति जताई। उन्होंने इन विषयों पर शास्त्रीय प्रमाणों और तर्कों के आधार पर चर्चा की आवश्यकता बताई।
शंकराचार्य ने रामपाल से जुड़े 18 प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख करते हुए उनकी पुस्तकों ‘ज्ञान गंगा’ और ‘जीने की राह’ में की गई टिप्पणियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि रामपाल अपने विचारों को लेकर आश्वस्त हैं, तो उन्हें किसी तटस्थ स्थान पर शास्त्रार्थ के लिए आगे आना चाहिए।
इस दौरान शंकराचार्य ने कथित दुष्प्रचार का शास्त्रीय आधार पर जवाब रखने के लिए शिवांश नारायण द्विवेदी को अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने की घोषणा की। साथ ही द्विवेदी द्वारा संकलित पुस्तक ‘रामपाल का रसातल गमन’ का विमोचन किया गया।


