नीतीश-तेजस्वी के बाद अब चंद्रबाबू नायडू से मिले स्टालिन,खुद बताया क्या बात हुई

नीतीश-तेजस्वी के बाद अब चंद्रबाबू नायडू से मिले स्टालिन,खुद बताया क्या बात हुई
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पटना। पटना से एक ही प्लेन में बैठकर नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव दिल्ली आए थे। दोनों पहले आगे पीछे सीट पर बैठे थे, बाद में नीतीश ने तेजस्वी को बुलाकर अपने बगल में बिठा लिया। क्या बात हुई? इस सवाल पर तेजस्वी ने कहा कि सब कुछ नहीं बता सकते। इस पर चर्चा हो ही रही थी कि INDIA गठबंधन में शामिल तमिलनाडु के सीएम एम। के। स्टालिन ने एनडीए के प्रमुख नेता चंद्रबाबू नायडू के साथ मुलाकात की तस्वीरें शेयर कर दीं।

दरअसल, लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद छोटे दलों की भूमिका बढ़ गई है। भाजपा को पूर्ण बहुमत न मिलने से सरकार बनाने के लिए सहयोगियों का साथ जरूरी है। फिलहाल नीतीश कुमार और TDP चीफ चंद्रबाबू नायडू ने एनडीए को अपना समर्थन पत्र दे दिया है। नीतीश कुमार नई सरकार बनने तक दिल्ली में ही टिके रहे सकते हैं। ऐसे में सारी नजरें नायडू और नीतीश पर ही हैं। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि दोनों नेताओं ने कुछ डिमांड भी रखी है। वे मनमाफिक मंत्रालय मांग सकते हैं।

INDIA गठबंधन ‘Wait and Watch’की स्थिति में है। ऐसे में दिल्ली में चंद्रबाबू नायडू और स्टालिन की मुलाकात महत्वपूर्ण हो जाती है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि तेलुगु देशम पार्टी सुप्रीमो और एनडीए के प्रमुख नेता एन। चंद्रबाबू नायडू दक्षिणी राज्यों के अधिकारों की वकालत करते हुए केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

स्टालिन ने बताया कि उन्होंने नई दिल्ली हवाई अड्डे पर नायडू से मुलाकात की। दोनों ही नेता अपने-अपने गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे और रात में लौट रहे थे।

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स्टालिन ने कहा, ‘दिल्ली हवाई अड्डे पर थलाइवर कलैगनार (करुणानिधि) के पुराने मित्र चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात की। मैंने उन्हें शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि हम तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए सहयोग करेंगे।’

स्टालिन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास है कि वह (नायडू) केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, दक्षिणी राज्यों के हितों की वकालत करेंगे और हमारे अधिकारों की रक्षा करेंगे।’

सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार के कई बार पलटने वाले रुख और चंद्रबाबू के पहले मोदी सरकार के विरोध में होने के रुख को देखते हुए कई तरह की बातें कही जा रही हैं। हालांकि इतना तय है कि दोनों नेता अपने-अपने राज्य के लिए बड़ी डिमांड रखेंगे।


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