Friday, October 7, 2022
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर काशी में हुआ दुग्धाभिषेक

Updated on 17/September/2022 1:18:46 PM

वाराणसी/ जहाँ एक ओर पूरा देश अपने चहेते प्रधानमंत्री का 72वां जन्मदिन मना रहा था वहीं उनके लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में 72 वैदिक बटुकों ने गंगा में दुग्धाभिषेक किया। भाजपा महानगर कार्यसमिति सदस्य पवन शुक्ला के नेतृत्व में अहिल्याबाई घाट पर विप्र समाज व भाजपा कार्यकर्ताओं ने शहर दक्षिणी के विधायक व पूर्व राज्यमंत्री डा. नीलकंठ तिवारी के मुख्य आतिथ्य में 51 लीटर दूध व केशर जल से नरेंद्र मोदी के दीर्घायुस्व की कामना से अभिषेक किया। प्रारम्भ में वैदिक पंडित उदित नारायण मिश्र के आचार्यत्व में षोडशोपचार पूजन किया। इसके पश्चात वैदिक सूक्त के मंत्रों से केशर जल व दूध से अभिषेक किया। इस अवसर पर डा.नीलकंठ तिवारी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी जी की आस्था सदैव से गंगा में रही है और इसी वजह से नमामि गंगे की स्थापना की गयी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विशाल औढ़ेकर ने किया। शामिल प्रमुख लोगों में रमेश तिवारी,विजय द्विवेदी,प्रकाश गुप्ता,डा.नीरज पाण्डेय,संदीप चतुर्वेदी,मृदुल शास्त्री, शामिल थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन धूमधाम से

मना रहा है। पीएम नरेन्‍द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को सांस्‍कृतिक और पर्यटन की राजधानी का दर्जा शंघाई सहयोग संगठन की ओर से मिलने के बाद अब काशी को और भी वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। यहां का कारोबार सहयोग संगठन में शामिल देशों के बीच अब अपनी पहचान बनाने जा रहा है। काशी को पीएम नरेन्‍द्र मोदी के प्रयासों ने काफी बदल दिया है। 2014 से 2022 के बीच आठ सालों में पीएम ने तमाम मौकों पर काशी को रिटर्न गिफ्ट देकर शहर को वैश्विक पहचान दिलाने में सफलता हासिल की है। 

काशी विश्‍वनाथ कारिडोर : श्री काशी विश्‍वनाथ कारिडोर के जरिए काशी की पहचान बाबा विश्‍वनाथ धाम को दिव्‍य और भव्‍य पीएम नरेन्‍द्र मोदी की पहल पर किया गया है। बाबा दरबार में अब काफी आस्‍थावान प्रांगण में आ सकते हैं। यहां का आकार अब काफी विस्‍तृत क्षेत्र में करने के साथ ही कारिडोर अब विश्‍वभर का ध्‍यान अपनी ओर खींच रहा है। 

गंगा में नमो घाट : नमो घाट पूर्व में खिड़किया घाट हुआ करता था। इस गंगा घाट पर विशेष आर्थिक बजट के जरिए गंगा में स्‍नान के साथ ही विशेष साज सज्‍जा कर यहां एंफ‍ीबियस प्‍लेन उतारने की तैयारियों को बल दिया है। माना जा रहा है कि दशाश्‍वमेध घाट के बाद यह प्रमुख गंगा घाट के रूप में जल्‍द ही अपनी पहचान साबित करेगा। 

रामनगर बंदरगाह : नेशनल वाटरवे गंगा के जरिए समुद्री मार्ग से यह वाराणसी के रामनगर बंदरगाह तक जलीय यातायात को बढ़ावा देने के साथ ही माल ढुलाई के लिहाज से भी इसे बांग्‍लादेश से जोड़ा गया है। क्रूज संचालन के साथ ही माल लाने और ले जाने के लिए यह काशी तक गंगा के रास्‍ते सफर का बेहतरीन पड़ाव है। 

रिंग रोड : रिंग रोड के जरिए पीएम की कल्‍पना का शहर बनारस अब जाम के झाम से भी मुक्‍त होता जा रहा है। शहर के चारों ओर रिंग रोड से शहर के भीतर प्रवेश करने और शहर के बाहर से ही दूर जाने के लिए सरल मार्ग का लंबा चौड़ा प्रोजेक्‍ट शहर को जाम ही नहीं बल्कि प्रदूषण से भी बचा रहा है। 

जापान के सहयोग से पीएम नरेंद्र की पहल पर रुद्राक्ष कन्‍वेंशन सेंटर जापान के तत्‍कालीन पीएम शिंजो आबे ने बनारस को गिफ्ट किया था। जिसे पीएम ने लोकार्पित किया तो वाराणसी शहर को प्रमुख अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर का एक आयोजन स्‍थल मिल गया।  

दीन दयाल हस्‍तकला संकुल बड़ा लालपुर में काशी के शिल्‍प ही नहीं बल्कि काशी की समृद्ध विरासत भी झलकती है। काशी में विकास का बड़ा पारंपरिक बाजार यहां पर आकार ले रहा है। यहां शिल्‍प मेले के साथ ही प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन भी हो चुका है।  

 कभी गड्ढों में काशी का विकास छिपा बैठा था। आज पीएम नरेंद्र मोदी की पहल पर प्रमुख सड़कों का निर्माण और उसे राष्‍ट्रीय राजमार्ग के साथ रिंग रोड और पूर्वांचल एक्‍सप्रेस वे तक से जोड़ने की कवायद शुरू कर शहर की सड़कों को दुरुस्‍त कराया है।  

मंडुआडीह (बनारस) स्‍टेशन से शुरू रेलवे स्‍टेशनों के कायाकल्‍प की योजनाओं ने जो गति प‍कड़ी है वह अब बुलेट ट्रेन और हाई स्‍पीड रेल कारिडोर तक आ पहुंचा है। कैंट स्‍टेशन पर एस्‍केलेटर, लिफ्ट और गैलरी आदि परियोजनाओं ने इसे वैश्विक स्‍तर पर नई पहचान दी है। 

स्‍मार्ट सिटी में अंडरग्राउंड केबल, गैस आ‍पूर्ति, सड़क, पानी और बिजली ही नहीं तमाम नागरिक सुविधाओं को विकसित करने के साथ पार्क, पार्किंग, मार्ट, कांप्‍लेक्‍स ही नहीं बल्कि यातायात और सीसीटीवी का संजाल ऐसा बिछा कि अब अपराधी तक बच नहीं पाते।  

गंगा में सीधे मलजल जाने पर रोक लगाने के साथ ही पीएम के प्रयासों से गंगा में सीवर ट्रीटमेंट होने के बाद पानी अब गंगा में छोड़ा जा रहा है। एसटीपी लगने के बाद गंगा में सीधे मलजल जाने पर रोक लगा दी गई है। इससे गंगा का पानी भी साफ हुआ है। 

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