बिहार में जब जज के सामने ही उलझ पड़े दो वकील,अब देना पड़ेगा अदालत को जवाब

बिहार में जब जज के सामने ही उलझ पड़े दो वकील,अब देना पड़ेगा अदालत को जवाब
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सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी सिविल कोर्ट के दो वरीय अधिवक्ता कोर्ट में जज के सामने ही झगड़ने लगे। हद तो यह कि अन्य अधिवक्ताओं के समझाने के बाद भी दोनों अधिवक्ता शांत नही हुए और जज की मौजूदगी झगड़ते ही रहे। दोनों वरीय अधिवक्ता भूल गए थे कि वे अपने घर पर नही, बल्कि कोर्ट में खड़े है। जज को उक्त दोनों अधिवक्ताओं की कार्यशैली इतना नागवार लगा कि वे कोर्ट को छोड़कर अपने चैम्बर में चले गए। इसके बाद दोनों वकीलों से जज ने स्पष्टीकरण पूछा है।

पति-पत्नी के विवाद का मामला
यह वाकया परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के कोर्ट का है। कोर्ट में एक दंपति का मुकदमा चल रहा है। पति राजेश कुमार की ओर से अधिवक्ता रमेश चंद्र काम कर रहे है, तो पत्नी पूजा कुमारी की ओर से अधिवक्ता विष्णुदेव शुक्ला पैरवी करते है। उक्त दंपति में विवाद चल रहा है,जिसकी सुनवाई उक्त कोर्ट में हो रही है। ये घटना चार मार्च की है, जब आवेदक यानी राजेश कुमार के अधिवक्ता रमेश चंद्र और विपक्षी के अधिवक्ता विष्णुदेव शुक्ला में भिड़ंत हो गई थी। यह मामला अब भी कोर्ट में चर्चा का विषय बना हुआ है। जज के गंभीर होने और एक्शन लेने से मामला और चर्चा में आ गया है।

क्या है यह पूरा वाकया
बताया गया है कि चार मार्च को प्रधान न्यायाधीश उक्त मामले की सुनवाई कर रहे थे। इसी दौरान आवेदक राजेश कुमार के अधिवक्ता रमेश चंद्र ने कोर्ट को यह जानकारी दी कि पिछली बार यानी 28 फरवरी 24 को सुनवाई के दौरान विपक्षी (पूजा कुमारी) की ओर से आवेदन दिया गया था कि वह आवेदक (राजेश कुमार) के साथ दांपत्य जीवन निर्वहन करना चाहती है। चूंकि आवेदक ने विपक्षी के साथ दांपत्य अधिकारों की प्रतिस्थापना के लिए वाद दाखिल किया है। वकील रमेश चंद्र ने कोर्ट से आग्रह किया कि आवेदक राजेश कुमार के आवेदन को स्वीकार कर डिक्री तैयार किया जाए।

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भड़क गए विपक्षी अधिवक्ता
आवेदक राजेश कुमार के अधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि 28 फरवरी 2024 से उक्त दंपति साथ रह रहे है, परंतु वर्तमान हालात में आवेदक राजेश विपक्षी (पत्नी) को साथ रखने को इच्छुक नहीं है। विपक्षी को नहीं रखने की बात सुनते ही उसके वरीय अधिवक्ता विष्णुदेव शुक्ला एकाएक भड़क गए और आक्रोशित हो गए। फिर दोनों अधिवक्ता कोर्ट में आपस में उलझ गए। दोनों का यह व्यवहार कोर्ट को अच्छा नहीं लगा। कोर्ट के साथ ही अधिवक्ताओं ने भी दोनों को समझा कर शांत कराने का काफी प्रयास किया, पर दोनों पर कोई असर नही पड़ा।

नाराज होकर जज अपने चैम्बर में चले गए
काफी प्रयास के बावजूद जब दोनों अधिवक्ता शांत नही हुए, तो प्रधान न्यायाधीश कोर्ट से अपने चैंबर में चले गए। इस मामले को लेकर प्रधान न्यायाधीश ने दोनों अधिवक्ताओं से स्पष्टीकरण पूछा है। इस आशय के पत्र में न्यायाधीश ने कहा है कि विवाद के बाद जिन वादों की सुनवाई नहीं की जा सकी, उन वादों के पक्षकारों को असुविधा हुई और कोर्ट का भी अपमान हुआ। प्रधान न्यायाधीश ने दोनों अधिवक्ताओं से इस आशय का जवाब मांगा है कि क्यों नही उनके खिलाफ आवश्यक और उचित कार्रवाई की जाए।


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