पीएम मोदी से हिंदी में बात करने वाले कौन हैं जापानी लेखक तोमियो मिजोकामी

पीएम मोदी से हिंदी में बात करने वाले कौन हैं जापानी लेखक तोमियो मिजोकामी

नई दिल्ली | जी-7 के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान के हिरोशिमा पहुंच गए हैं। इस दौरान उन्होंने हिरोशिमा में प्रसिद्ध जापानी लेखक डॉ. तोमियो मिजोकामी से मुलाकात की। आपको बता दें कि वह फर्राटेदार हिंदी और पंजाबी बोल सकते है। इसके अलावा उनको देश ने पद्म श्री से भी सम्मानित किया है।

कौन है प्रोफेसर तोमियो मिजोकामी?
प्रोफेसर तोमियो मिजोकामी एक पद्म पुरस्कार विजेता, एक प्रतिष्ठित हिंदी और पंजाबी भाषाविद् हैं। उन्होंने जापान के लोगों के बीच भारतीय संस्कृति और साहित्य को लोकप्रिय बनाने के लिए कई प्रयास किए हैं। मुलाकात के दौरान मिजोकामी ने जापान में अगले ‘विश्व हिंदी सम्मेलन’ आयोजित करने के लिए पीएम मोदी को मना लिया है।

हिंदी में कैसे बढ़ी रुचि?
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान मिजोकामी ने बताया कि उनका जन्म जापान के शहर कोबे में हुआ था। उस समय इस शहर में भारतीयों की आबादी ज्यादा हुआ करती थी। प्रोफेसर से जब पूछा गया कि वह हिंदी में रुचि क्यों रखते हैं, तो उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा सीखने के लिए वह हमेशा से उत्सुक थे। इस भाषा का उन पर काफी प्रभाव पड़ा है।

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के थे प्रशंसक
मिजोकामी ने बताया कि वह पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रशंसक थे। उन्होंने बताया कि उस दौरान नेहरू का एक महत्वपूर्ण वैश्विक प्रभाव था। गुट-निरपेक्ष आंदोलन (NAM) के फाउंडर नेहरू हम युवा लोगों के लिए एक प्रेरणा थे, जो केवल स्थिरता और शांति चाहते थे। तो ऐसे नेता की भाषा क्यों नहीं सीखते?

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2018 में ‘पद्म श्री’ पुरस्कार से किया गया सम्मानित
वर्ष 2018 में ओसाका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. तोमियो मिजोकामी को साहित्य और शिक्षा में उनके योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘पद्म श्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें भारत के भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा प्राप्त हुआ था। हिंदी और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने में उनकी ‘अटूट सेवा’ को देखते हुए उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मिजोकामी को 2001 में उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘हिंदी रत्न’ से भी सम्मानित किया था।

इलाहाबाद में सीखी हिंदी
81 वर्षीय लेखक मिजोकामी ने अपना जीवन भारत और जापान (ओसाका) में हिंदी के अध्ययन, रिसर्च और टिचिंग में बिताया है। 1941 में उनका जन्म हुआ। अपने ग्रेजुएशन के बाद, उन्होंने 1965 से 1968 तक इलाहाबाद में हिंदी सीखी। इस अवधि के दौरान, उन्होंने बंगाली शिक्षा भी ली।

साल के अंत में, वह वापस जापान लौट गए और ओसाका विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग में एक शोध सहयोगी के रूप में काम करना शुरू किया। मिजोकामी ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से हिंदी में मास्टर डिग्री हासिल की। 1983 में, उन्होंने अपनी पीएच.डी. हिंदी में हासिल की। आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन उनके पास जापानी सबटाइटल के ट्रांसलेट के साथ लगभग 301 प्रमुख हिंदी भाषा के फिल्मी गाने हैं।

भारतीय भाषाओं को दिया बढ़ावा
मिजोकामी ने संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया है। 1989 से 1990 तक, शिकागो विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में स्कोलर के रूप में आते रहे। इस दौरान उन्होंने पंजाबी भी पढ़ाया। उन्हें 65 वर्ष की आयु में ओसाका यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज का ‘प्रोफेसर एमेरिटस’ नामित किया गया था। मिजोकामी को 1999 में लंदन में ‘विश्व हिंदी सम्मान’ सहित कई अन्य सम्मान भी मिले है।

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