फेक अकाउंट से जातीय संघर्ष फैलाने वाले तत्व समाज और राष्ट्र के लिए घातक : मुख्यमंत्री

फेक अकाउंट से जातीय संघर्ष फैलाने वाले तत्व समाज और राष्ट्र के लिए घातक : मुख्यमंत्री

बिरसा मुंडा राष्ट्रीय संगोष्ठी में जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपरा को बताया सनातन संस्कृति की आधारशिला

rajeshswari

वाराणसी (जनवार्ता)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को वसंत महिला महाविद्यालय में आयोजित बिरसा मुंडा पर आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर फेक अकाउंट बनाकर समाज में जातीय संघर्ष फैलाने की साजिश कर रहे हैं। ऐसे तत्व समाज और राष्ट्र दोनों के लिए घातक हैं, और उन्हें चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जनजातीय समाज को भारत की सनातन परंपरा की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में मंदिर जाने वाला और न जाने वाला, दोनों ही हिंदू हैं। चार्वाक और भगवान बुद्ध ने वेदों को नहीं माना, फिर भी उन्हें पूज्य स्थान मिला। ऐसे में जनजातीय समाज को भी समान सम्मान मिलना चाहिए।

अपने वक्तव्य के दौरान मुख्यमंत्री ने दो-तीन साल पहले की एक आगजनी की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रारंभ में यह घटना किसी समुदाय से जोड़ी गई थी, लेकिन जांच में सामने आया कि एक व्यक्ति ने भगवा गमछा पहनकर ‘या अल्लाह’ बोलते हुए आगजनी की थी, जिससे दूसरे समुदाय को बदनाम किया जा सके। उन्होंने इसे एक सुनियोजित साजिश बताया और कहा कि ऐसे फर्जी तत्वों को समाज से बाहर करना ही राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक है।

योगी आदित्यनाथ ने जनजातीय समाज को भारत का मूल समाज करार देते हुए कहा कि हर युग में इस समाज ने देश और संस्कृति की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने भगवान राम, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार वनवासी और जनजातीय समाज ने इन महापुरुषों को सहयोग देकर इतिहास रचा।

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उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें जनजातीय समाज तक संवाद और सुविधाएं पहुंचाने में विफल रहीं। लेकिन वर्तमान सरकार ने 2017 के बाद जनजातीय गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया, जिससे उन्हें पहली बार मतदान, राशन, पेंशन, आवास और जमीन के पट्टे जैसी सुविधाएं मिलीं। उन्होंने कहा कि जहां संवाद बाधित होता है, वहीं संघर्ष की स्थिति जन्म लेती है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जनजातीय समाज न केवल पर्यावरण से सामंजस्य बनाकर रहता है, बल्कि वेदों के सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात करता है। उन्होंने कहा कि यह समाज प्रकृति की पूजा करता है और उसका संरक्षण करता है, जबकि शहरी समाज केवल औपचारिक पूजा कर प्रकृति के साथ विपरीत व्यवहार करता है।

कांवड़ यात्रा के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह यात्रा सामाजिक समरसता का प्रतीक है, जिसमें किसी जाति, मत या संप्रदाय का भेद नहीं होता। फिर भी कुछ तत्व इसे उपद्रव से जोड़ने का प्रयास करते हैं। उन्होंने जौनपुर की एक घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे नियमों की अनदेखी कर निकाले गए ताजिए की वजह से दुर्घटना हुई, और बाद में उत्पन्न अव्यवस्था को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 नवंबर को घोषित जनजातीय गौरव दिवस की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे जनजातीय समाज को सम्मान मिला है और सरकार ने कोल जनजाति जैसे समुदायों को शत-प्रतिशत सरकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम की स्मृतियों से जुड़े कोल समाज को समाज की मुख्यधारा में लाना हमारी प्रतिबद्धता है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वसंत महिला महाविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत की प्रशंसा करते हुए इसे भारतीय गुरुकुल परंपरा की जीवंत मिसाल बताया। उन्होंने एनी बेसेंट, पं. मदन मोहन मालवीय और कृष्णमूर्ति फाउंडेशन जैसे संस्थानों के योगदान की सराहना की, जिन्होंने भारतीय संस्कृति के संरक्षण में यह संस्थान स्थापित किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पद्मश्री अशोक भगत के सेवा कार्यों की सराहना की और कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मार्गदर्शन में साधनविहीन समाज के बीच प्रभावी सेवा कार्य किए हैं। उन्होंने महाविद्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

इस संगोष्ठी में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, अनिल राजभर, राज्यमंत्री रविन्द्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, डॉ अवधेश सिंह, सुशील सिंह, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, धर्मेन्द्र सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महाविद्यालय प्राचार्य अलका सिंह सहित अनेक विशिष्ट जन उपस्थित रहे।

Shiv murti

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