बिजली कर्मियों ने निजीकरण के हर स्वरूप के पुरजोर विरोध करने का लिया संकल्प
वाराणसी (जनवार्ता)। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले बनारस के बिजली कर्मियों ने मंगलवार को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश के अन्य जनपदों की तर्ज पर यह प्रदर्शन हुआ, जिसमें कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की चेतावनी को ब्लैकमेल करार देते हुए निजीकरण के हर स्वरूप का पुरजोर विरोध करने का संकल्प लिया।


संघर्ष समिति के नेताओं ने बताया कि 10 अक्टूबर 2025 को हुई ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम) की बैठक में उत्तर प्रदेश सहित छह राज्यों—आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु—को चेतावनी दी गई कि निजीकरण के तीन विकल्पों में से एक चुनें, अन्यथा केंद्र से मिलने वाली वित्तीय मदद बंद हो जाएगी। बैठक में इन राज्यों के ऊर्जा मंत्री शामिल थे।
जीओएम के मिनट्स के अनुसार, तीन विकल्प हैं: विद्युत वितरण निगमों की 51% इक्विटी निजी कंपनी को बेचना; सरकार अनसस्टेनेबल डेट उठाएगी और निजी कंपनी को 0% ब्याज पर 50 वर्षीय वित्तीय सहायता देगी। निगमों का प्रबंधन निजी क्षेत्र को सौंपना; सरकार डेट उठाएगी और 5 वर्ष तक ग्रांट देगी। कंपनियों को सेबी में लिस्टिंग कराना (ग्रेडिंग ‘ए’ जरूरी); लिस्टिंग पर केंद्र ग्रांट देगा।
संघर्ष समिति ने इन शर्तों को निजीकरण के लिए ब्लैकमेल बताया और कहा कि कोई विकल्प स्वीकार नहीं होगा। समिति ने बैठक में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के पदाधिकारियों की मौजूदगी पर सवाल उठाया, इसे निजीकरण के लिए बिचौलिया भूमिका का प्रमाण बताया।
समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी पिछले 336 दिनों से आंदोलनरत हैं। अन्य राज्यों के कर्मचारियों से विचार-विमर्श कर निजीकरण विरोधी साझा रणनीति 3 नवंबर को मुंबई में तैयार की जाएगी।
सभा को ई. मायाशंकर तिवारी, ई. एस.के. सिंह, हेमन्त श्रीवास्तव, अरविंद कौशानंदन, ब्रिज सोनकर, प्रवीण सिंह, रंजीत पटेल, योगेंद्र कुमार, अलका कुमारी, पूजा कुमारी, धनपाल सिंह, मनोज यादव, एस.के. सरोज आदि ने संबोधित किया।

