गणपति गणेश काटो कलेश | विघ्नहर्ता गणेश से सुख-शांति की प्रार्थना
गणपति गणेश काटो कलेश भक्ति का वह मंत्र है जिसमें भक्त पूरे मन से भगवान गणेश से अपने जीवन के दुःख, बाधा और कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करता है। भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ कहा गया है, अर्थात जो हर प्रकार के विघ्न और परेशानी का अंत करते हैं। जब जीवन में उलझनें बढ़ जाती हैं, तब यह भाव हमारे अंदर विश्वास जगाता है कि गणेश जी का स्मरण करते ही सब कुछ सरल हो जाएगा। यह मंत्र केवल शब्द नहीं, बल्कि श्रद्धा, आस्था और शक्ति का स्रोत है, जो हर भक्त को नई ऊर्जा प्रदान करता है।

विघ्न हरण मंगल करण गौरी पुत्र गणेश,
नंद के दाता प्रभू काटो सकल कलेश…..
गणपति गणेश काटो कलेश,
विघ्न हरोऔर मंगल कर दो,
आनंद के दाता आनंद कर दो,
आनंद आनंद आनंद भर दो,
सबसे पहले हम तुमको मनाते,
फिर सारे देवी देवता को बुलाते,
तेरे पूजा से सुभ काम सब होता है,
तेरे ही पूजा में सुभ लाभ होता हैं,
आकर ये पूजा सफल मेरा कर दो,
आनंद के दाता आनंद भर दो,
आनंद के दाता आनंद कर दो…….
गणेश जी की उपासना कैसे करें
- समय: बुधवार या चतुर्थी के दिन प्रातःकाल सबसे शुभ माना जाता है।
- स्थान: स्वच्छ और शांत वातावरण में गणेश जी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष।
- सामग्री: मोदक, दूर्वा, लाल फूल, दीपक, धूपबत्ती और जल।
- पूजन क्रम:
- सबसे पहले दीपक जलाकर गणेश जी को प्रणाम करें।
- लाल फूल और दूर्वा अर्पित करें।
- “ॐ गण गणपतये नमः” और “गणपति गणेश काटो कलेश” का 11 या 21 बार जप करें।
- अंत में मोदक का भोग लगाएँ और शांत मन से ध्यान करें।
- भाव: मन में यह विश्वास रखें कि गणेश जी आपके हर कष्ट का निवारण करेंगे और जीवन में नई शुरुआत देंगे।
गणपति उपासना से मिलने वाले शुभ फल
- जीवन के विघ्न, कष्ट और मानसिक तनाव दूर होते हैं।
- साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ती है।
- कार्यों में सफलता और स्थिरता प्राप्त होती है।
- घर और परिवार में सौहार्द, शांति और समृद्धि आती है।
- मन की शांति और ईश्वर पर भरोसा दृढ़ होता है।
निष्कर्ष
“गणपति गणेश काटो कलेश” का भाव यह सिखाता है कि जब भी जीवन में कठिनाइयाँ आएँ, तो सबसे पहले विघ्नहर्ता गणेश जी का स्मरण करें। उनका आशीर्वाद हमें न केवल कष्टों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि जीवन की हर दिशा में प्रकाश और मार्गदर्शन प्रदान करता है। सच्चे मन से यदि हम गणेश जी को पुकारें, तो वे हर बाधा को अवसर में बदल देते हैं। इसलिए हर दिन कुछ क्षण निकालकर यह भाव कहें — “हे गणपति बाप्पा, मेरे जीवन के कलेश हर लीजिए और मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखिए।”

