करो विनती मेरी स्वीकार | समर्पण, श्रद्धा और विश्वास की सच्ची पुकार

करो विनती मेरी स्वीकार | समर्पण, श्रद्धा और विश्वास की सच्ची पुकार

करो विनती मेरी स्वीकार यह पंक्ति सच्चे भक्त की उस हृदयस्पर्शी प्रार्थना का प्रतीक है जो वह पूरे मन, तन और आत्मा से भगवान के चरणों में अर्पित करता है। यह भाव बताता है कि जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर विनम्रता से ईश्वर के सामने झुकता है, तब उसकी हर पुकार सुनी जाती है। यह केवल शब्द नहीं, बल्कि भक्ति की वह ऊर्जा है जो हमें प्रभु के करीब ले जाती है। भक्ति का यह रूप हमें विश्वास दिलाता है कि भगवान सदा अपने भक्तों की विनती सुनते हैं — बस मन सच्चा होना चाहिए।

rajeshswari

गजानन आ जाओ इक बार,
करो विनती मेरी स्वीकार…..

शिव के नंदन हे दुख भंजन,
करो मुझपे भी उपकार,
करो विनती मेरी स्वीकार,
गजानन आ जाओ इक बार……

तुम विनायक हो सबके सहायक,
स्वामी तुम ही हो सृजनहार,
करो विनती मेरी स्वीकार,
गजानन आ जाओ इक बार…..

समय बुरा ना आए कभी उसका,
भगवन तुमको ध्याये जो बारंबार,
करो विनती मेरी स्वीकार,
गजानन आ जाओ इक बार……

हे गजवंदन करूं मैं भी नित वंदन,
हरो मेरे भी दुखों का भार,
करो विनती मेरी स्वीकार,
गजानन आ जाओ इक बार…..

ज्योतिर्मयी प्रभु छवि तुम्हारी,
करो दूर सब अंधियार,
करो विनती मेरी स्वीकार,
गजानन आ जाओ इक बार……

गणनायक जननायक हो तुम,
तुम्हारे चरणों में खुशियों का अम्बार,
करो विनती मेरी स्वीकार,
गजानन आ जाओ इक बार……

आनंद हो नाथ परमानंद तुम,
स्वामी हो सब सुखों का सार,
करो विनती मेरी स्वीकार,
गजानन आ जाओ इक बार…..

विघ्नहर्ता विघ्न तुम हरते,
भव से तुम ही तो लगाते पार,
करो विनती मेरी स्वीकार,
गजानन आ जाओ इक बार…..

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आकर थामों पतवार मेरी भी,
प्रभु जी करो मेरा भी उद्धार,
प्रभु जी करो राजीव का भी उद्धार,
करो विनती मेरी स्वीकार,
गजानन आ जाओ इक बार…..

विनती और प्रार्थना करने की साधना

  1. समय: प्रातःकाल या रात्रि में सोने से पहले का शांत समय।
  2. स्थान: घर के पूजाघर या किसी शांत, पवित्र स्थान पर।
  3. सामग्री: दीपक, धूप, फूल, जल, और अपने आराध्य का चित्र या मूर्ति।
  4. पूजन क्रम:
    • दीपक जलाएँ और कुछ क्षण मौन होकर भगवान का ध्यान करें।
    • अपने मन की बात ईमानदारी से प्रभु के समक्ष रखें — बिना किसी दिखावे के।
    • फिर यह भाव कहें — “हे प्रभु, करो विनती मेरी स्वीकार।”
    • भगवान के नाम का जप करें या कोई भक्ति गीत गाएँ।
    • अंत में प्रसाद चढ़ाएँ और शांति से कुछ क्षण ध्यान करें।
  5. भाव: मन को पूर्णतः समर्पण की अवस्था में रखें; कोई शिकायत या अपेक्षा न रखें, केवल प्रेम और विश्वास रखें।

विनम्र भक्ति से प्राप्त होने वाले शुभ फल

  • मन की उलझनें और दुख धीरे-धीरे समाप्त होते हैं।
  • जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मक सोच का संचार होता है।
  • प्रभु पर गहरा विश्वास और आत्मिक शक्ति बढ़ती है।
  • कठिन समय में मार्गदर्शन और साहस की अनुभूति होती है।
  • मन में करुणा, दया और संतोष का भाव स्थायी रूप से बस जाता है।

निष्कर्ष

“करो विनती मेरी स्वीकार” केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि आत्मा की वह पुकार है जो सीधे प्रभु के हृदय तक पहुँचती है। जब हम सच्चे मन से अपनी बात भगवान को सौंप देते हैं, तो जीवन की कठिनाइयाँ भी सहज लगने लगती हैं। यह भाव हमें सिखाता है कि प्रभु हमेशा सुनते हैं — बस हमें विश्वास बनाए रखना होता है। इसलिए हर दिन कुछ पल ईश्वर से जुड़कर यह विनती करें — “हे प्रभु, मेरे मन की प्रार्थना को स्वीकार कर लीजिए और मुझे अपने मार्ग पर चलने की शक्ति दीजिए।”

Shiv murti

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