राष्ट्रीय हिन्दू दल ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ किया धरना-प्रदर्शन
वाराणसी (जनवार्ता)। राष्ट्रीय हिन्दू दल संगठन के अध्यक्ष रोशन पाण्डेय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में लागू किए गए ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियम, 2026’ का तीव्र विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से लिखा पत्र भेजा है। साथ ही, उन्होंने सवर्ण (सामान्य वर्ग) सांसदों को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां डाक द्वारा भेजकर इस्तीफा देने की मांग की है।


रोशन पाण्डेय ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने सवर्ण समाज खासकर ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत समुदाय को सत्ता में पहुंचाने के लिए वोट मांगे थे, लेकिन अब यूजीसी के इस नए नियम के माध्यम से उन पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की जा रही है। उन्होंने कहा, “भाजपा ने यूसीसी, जनसंख्या नियंत्रण, घुसपैठिया नियंत्रण और गौ हत्या पर कानून लाने का वादा किया था, लेकिन इसके बजाय सवर्णों को मिटाने वाला यह काला कानून लाया गया है। यह हिंदुओं को आपस में बांटने और ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति का हिस्सा है।”
इस मौके पर राष्ट्रीय बजरंग दल के काशी विभागीय उपाध्यक्ष संतोष द्विवेदी उर्फ पप्पू ने कहा कि सवर्ण समाज पहले से ही एससी-एसटी एक्ट के कारण पीड़ित है। अब यूजीसी का यह नियम और भी काला कानून साबित हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि विश्वविद्यालयों में पहले से ही प्रशासनिक विभाग (एडमिनिस्ट्रेटिव डिपार्टमेंट) मौजूद हैं, तो इस कानून की क्या जरूरत थी? संतोष द्विवेदी ने चेतावनी दी कि सवर्ण समाज ने वोट देकर भाजपा को सत्ता दी है, तो जरूरत पड़ने पर सत्ता से हटा भी सकता है। उन्होंने यूजीसी नियम वापस लेने को ही भाजपा की भलाई बताया।
प्रदर्शन में राहुल सोनकर, राजेश चौहान, दीपक केशरी सहित राष्ट्रीय हिन्दू दल और बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
यह विरोध यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ देशभर में चल रहे प्रदर्शनों का हिस्सा है, जिसमें कई जगह खून से पत्र लिखे गए, चूड़ियां भेजी गईं और इस्तीफे दिए जा रहे हैं। सवर्ण संगठन इसे ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ और सामान्य वर्ग विरोधी बता रहे हैं, जबकि यूजीसी का दावा है कि यह उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए लाया गया है।

