तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर माझी समाज के साथ एसीपी ने की अहम बैठक
वाराणसी (जनवार्ता)। प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर बुधवार को माझी समाज के प्रतिनिधियों और पुलिस प्रशासन के बीच एक अहम बैठक हुई। बैठक में नौका संचालन, तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और गंगा की स्वच्छता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गहन मंथन किया गया।

एसीपी दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजन त्रिपाठी ने मीडिया को बताया कि माझी समाज के अध्यक्ष तथा इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा हुई। बैठक का मुख्य फोकस नमो घाट पर संचालित वाटर वेसल, नाविकों की समस्याओं, दुर्घटनाओं की रोकथाम, बाबा विश्वनाथ धाम आने-जाने में होने वाली असुविधाओं और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा पर रहा।
एसीपी त्रिपाठी ने कहा, “प्रशासन और माझी समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का उद्देश्य है ताकि गंगा स्नान और नौकायन के दौरान हर किसी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।” उन्होंने बताया कि वाराणसी के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकास के साथ गंगा में बड़े बोट्स का संचालन बढ़ गया है, जिससे सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
माझी समाज की प्रमुख मांग रही कि नाव संचालन मुख्य रूप से स्थानीय समाज के सदस्यों द्वारा ही किया जाए। बाहरी और गैर-सामाजिक तत्वों द्वारा नाव चलाने से समाज में रोष व्याप्त है। इस मुद्दे पर भी विस्तार से बात हुई।
गंगा प्रदूषण पर प्रशासन का रुख सख्त है। एसीपी ने कहा कि गंगा को प्रदूषित करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन के पास कई वीडियो उपलब्ध हैं, जिनमें गंदगी और आपत्तिजनक गतिविधियां दर्ज हैं। नाविकों और माझी समाज को बार-बार चेतावनी दी जाएगी कि मां गंगा की पवित्रता से कोई समझौता नहीं होगा।
बैठक में आपसी सहमति से कई समाधान निकालने पर जोर दिया गया, जिससे गंगा किनारे की गतिविधियों में सुधार की उम्मीद जगी है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बेहतर संसाधनों, सुरक्षा मानकों और समन्वय से बनारस की गंगा यात्रा को और सुरक्षित व सुगम बनाया जाएगा।

