वाराणसी में महाशिवरात्रि की भव्य तैयारियां: लाखों भक्तों के लिए सुरक्षा और सुविधा पर जोर
वाराणसी (जनवार्ता)। काशी विश्वनाथ धाम में महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी 2026 (रविवार) को बड़े उत्साह से मनाया जाएगा। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि की रात्रि में भगवान शिव की विशेष आराधना और जागरण होगा। इस बार लाखों श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ आने की उम्मीद के बीच प्रशासन ने कमर कस ली है। पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी ने मंदिर परिसर में उच्च स्तरीय बैठक कर भक्तों के लिए सुगम, सुरक्षित और सुखद दर्शन की पूरी रूपरेखा तैयार की है।

बैठक में अनुमान जताया गया कि इस बार करीब 20 लाख तक भक्त काशी पहुंच सकते हैं, हालांकि कुछ अनुमानों में 8-10 लाख की संख्या भी बताई गई है। भक्तों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए कई अहम फैसले लिए गए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात रहेगा। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी को और मजबूत किया जाएगा तथा ड्रोन की मदद से भीड़ पर निरंतर नजर रखी जाएगी, जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
भक्तों की सुविधा के लिए झांकी दर्शन (दूर से दर्शन) और जलाभिषेक की विशेष व्यवस्था रहेगी। स्पर्श दर्शन पर कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। मंदिर में लगातार 45 घंटे दर्शन की व्यवस्था प्रस्तावित है, जो 15 फरवरी की मंगला आरती से शुरू होकर 16 फरवरी की शयन आरती तक चलेगी। परिसर में पीने का पानी, चिकित्सा सहायता, आपातकालीन सेवाएं और स्वच्छता की पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सभी मार्गों को गड्ढा-मुक्त करने का कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है।
बैठक के बाद पुलिस कमिश्नर ने खुद क्षेत्र का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया और सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे करने के सख्त निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने और भक्तों की किसी भी समस्या का तुरंत समाधान करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा, “भक्तों की सुरक्षा और सुविधा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पूरा प्रशासन उनकी सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित है।”
काशी विश्वनाथ धाम को रंग-बिरंगी लाइटों, विद्युत झालरों और आकर्षक सजावट से जगमगाया जा रहा है। विवाहोत्सव की परंपराएं भी निभाई जाएंगी, जैसे त्र्यंबकेश्वर से हल्दी लाकर हल्दी रस्म का आयोजन। भक्तों से अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, भीड़भाड़ में धैर्य रखें और “हर-हर महादेव” के जयकारों से काशी को शिवमय बनाएं।

