रंगभरी एकादशी पर वाराणसी पुलिस सतर्क, लाखों श्रद्धालुओं के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम
वाराणसी (जनवार्ता)। फाल्गुन शुक्ल एकादशी यानी रंगभरी एकादशी (शुक्रवार) के अवसर पर काशी में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। इस धार्मिक उत्सव को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और सुरक्षा तथा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

रंगभरी एकादशी काशी में विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती का गौना कराकर उन्हें पहली बार काशी लाए थे। इस उपलक्ष्य में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ का दूल्हे के रूप में विशेष श्रृंगार किया जाता है, गुलाल-अबीर चढ़ाया जाता है और होली का रंगीन आगाज होता है। शाम को गर्भगृह में प्रतिमा विराजमान होने के बाद सप्तऋषि आरती संपन्न होगी। इस दौरान रजत पालकी यात्रा भी निकलती है, जिससे मंदिर परिसर और आसपास की गलियों में भारी भीड़ जुटती है।
डीआईजी शिव हरी मीणा ने बताया कि पुलिस, मंदिर प्रबंधन और पुजारियों के साथ विस्तृत बैठकें की गई हैं। बैठक में गलियों में आवागमन, मंदिर परिसर की व्यवस्था, क्राउड मैनेजमेंट, ट्रैफिक कंट्रोल और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया गया है और विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। यातायात में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे ताकि श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन मिले।
डीआईजी ने कहा, “हमारा प्रयास है कि पारंपरिक तरीके से कार्यक्रम संपन्न हो और किसी श्रद्धालु को असुविधा न हो। सुरक्षा के सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।” उन्होंने अपील की है कि श्रद्धालु अनुशासन बनाए रखें, भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतें और किसी समस्या पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
मंदिर पक्ष के वाचस्पति तिवारी ने बताया कि तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा का जायजा लिया है। रंगभरी एकादशी से होली तक काशी में उत्सव का माहौल रहेगा, इसलिए पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत करता है। पुलिस प्रशासन का यह प्रयास सुनिश्चित करेगा कि लाखों भक्त बिना किसी परेशानी के इस पावन अवसर का आनंद ले सकें।

