बीएचयू : प्रो. ओम शंकर ने लगाए कुलपति-प्रशासन पर गंभीर आरोप
माफी मांगे वरना करेंगे मानहानि का मुकदमा
वाराणसी (जनवार्ता)। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. ओम शंकर ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भारी आरोप लगाते हुए कहा है कि एक कर्मचारी के प्रमोशन रोकने और ओपीडी पर्ची शुल्क बढ़ाने के उनके विरोध के कारण उनके खिलाफ अवैध जांच समिति गठित कर दी गई है।

बुधवार को अपने चैंबर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रो. ओम शंकर ने दावा किया कि विभागाध्यक्ष के कार्यकाल में एक कर्मचारी के प्रमोशन पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा था। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी गई। इसी तरह ओपीडी पर्ची शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव का उन्होंने खुलकर विरोध किया, तो इस मामले में भी उनके विरुद्ध जांच प्रक्रिया शुरू हो गई।
प्रोफेसर ने कहा कि जो सीसीएस नियम बीएचयू में लागू ही नहीं हैं, उसी के आधार पर जांच समिति बनाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी अवैध समिति के सामने वे अपना बयान दर्ज नहीं कराएंगे।
प्रो. ओम शंकर ने यह भी बताया कि पिछले 20 वर्षों में बीएचयू में सीसीएस नियमों के तहत 500 से अधिक कर्मचारियों और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। खुद वे भी 15 महीने तक सस्पेंड रह चुके हैं।
सख्त चेतावनी देते हुए प्रोफेसर ने कहा, “अगर सोमवार तक कुलपति, कुलसचिव और उपकुलसचिव इस मामले में माफी नहीं मांगते हैं तो मैं उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करूंगा और थाने में शिकायत दर्ज कराऊंगा।”
यह घटना बीएचयू प्रशासन और शिक्षकों के बीच बढ़ते तनाव को एक बार फिर उजागर करती है। अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

